Sunjoy Joshi ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि आज ऊर्जा का सवाल केवल आपूर्ति का नहीं, बल्कि energy flows को de-securitise करने का है। दुनिया में electricity तेजी से वैश्विक ऊर्जा प्रणाली की backbone बन रही है, इसलिए ऊर्जा के भू-राजनीतिक आयाम भी बदल रहे हैं।
Bjorn Lomborg ने भारत की ऊर्जा नीति पर बात करते हुए कहा कि भारत को विकास और जलवायु लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाते हुए व्यावहारिक और लागत-प्रभावी ऊर्जा समाधानों पर ध्यान देना चाहिए।
David Victor ने वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऊर्जा संक्रमण केवल तकनीकी नहीं बल्कि राजनीतिक और आर्थिक प्रक्रिया भी है, जिसमें नीतिगत सहयोग और संस्थागत ढांचे की बड़ी भूमिका है।
Kira Vinke ने जलवायु परिवर्तन के मानव सुरक्षा और सामाजिक प्रभावों पर ध्यान दिलाया और कहा कि ऊर्जा संक्रमण को समावेशी और न्यायसंगत बनाना आवश्यक है।
Nikit Abhyankar ने ऊर्जा परिवर्तन में तकनीक, निवेश और नीति नवाचार की भूमिका पर चर्चा की और बताया कि स्वच्छ ऊर्जा में तेजी से निवेश भारत के विकास लक्ष्यों को मजबूत कर सकता है।
Gopalika Kundu ने भारत के संदर्भ में ऊर्जा परिवर्तन को विकास, रोजगार और औद्योगिक नीति से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस सत्र में यह स्पष्ट हुआ कि स्वच्छ ऊर्जा केवल पर्यावरणीय लक्ष्य नहीं, बल्कि कूटनीति, आर्थिक विकास और रणनीतिक नीति का भी महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है, जो Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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