‘अति उल्लेखनीय’
जिसको दुनिया ने आज जाना है
सच में ये किस्सा बड़ा पुराना है!
इसे सबको सुनना चाहिए और सबको सुनाना भी चाहिए। आस्थाओं और भावनाओं के नाम पर जो कुछ गोरखधंधा हो रहा है, वो अधार्मिक भी है और आपराधिक भी।
सवाल ये है कि जब ये सब इतने सालों से चल रहा था, और कुछ सर्वोच्च स्तरीय न्यासियों तक को इसके बारे में मालूम था तो फिर ये सब दबाया क्यों गया? सभी न्यासियों को इसके बारे में बताकर कभी कोई FIR क्यों नहीं हुई।
ट्रस्ट का एक अर्थ ‘विश्वास’ भी होता है, आशा है ट्रस्ट स्वयं इस विषय की गंभीरता को समझते हुए इस मामले की उच्च न्यायिक जाँच की माँग करेगा, निर्भय होकर दोषियों को दंड दिलवाएगा, चढ़ावे की राशि और बहुमूल्य धातुओं की पुनर्प्राप्ति करके विश्वास की पुनर्स्थापना करेगा क्योंकि आम जनता अपने चढ़ावे के पैसों और बहुमूल्य धातुओं के साथ हुए घपले-घोटाले की आशंका से बेहद आक्रोशित है।
सरकार मौन क्यों है? क्या जाँच की आँच से बड़े लोग डरे हुए हैं?