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उत्तर प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, उनकी कोई सुनने वाला नहीं है, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं। आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके। पावर कॉरपोरेशन के हालत बयां करता ये AI वीडियो। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर एवं मुकदमे वापस लिए जाएं। लेकिन आश्चर्य एवं अफसोस की बात है कि ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी उनका पूर्ण पालन नहीं हुआ है। इससे सरकार एवं प्रबंधन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है। माननीय ऊर्जा मंत्री जी एवं ऊर्जा प्रबंधन के बीच आपसी लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश की जनता एवं बिजली कर्मचारियों का हो रहा है, इस समय पूरे ऊर्जा विभाग में बिजली कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है, बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न चरम पर है, ऊर्जा निगमों में तानाशाही का माहौल है, जिससे बिजली कर्मियों के अंदर ही अंदर गहरा रोष व्याप्त हो रहा है, और वह कभी भी फूट सकता है। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि व्यापक हस्तक्षेप करते हुए हुए तत्काल अग्रिम कार्रवाई करने की कृपा करें, जिससे अनवरत प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराई जा सके तथा बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न भी रोका जा सके। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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ऊर्जा मंत्री के निर्देश के अनुसार मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने की मांग : संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन: ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का तीन वर्ष बाद भी पालन न होना चिंताजनक : उत्पीड़न समाप्त कर ऊर्जा निगमों में स्वस्थ कार्य वातावरण बनाया जाए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल को ज्ञापन सौंपकर मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तत्काल वापस लेने की मांग की। संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में सकारात्मक एवं सहयोगात्मक कार्य वातावरण स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी लंबित दंडात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए। संघर्ष समिति ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित मामलों को समाप्त करने के बजाय उत्पादन निगम के कर्मचारी श्री दिनेश सिंह को वृहद दंड दिया गया है, जिससे प्रदेश भर के बिजली कर्मियों में भारी असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त है। केंद्रीय पदाधिकारियों ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष को अवगत कराया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर एवं मुकदमे वापस लिए जाएं। संघर्ष समिति ने अपने ज्ञापन के साथ माननीय ऊर्जा मंत्री एवं संघर्ष समिति की संयुक्त प्रेस वार्ता की प्रतिलिपि तथा उत्तर प्रदेश सूचना विभाग द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य की प्रति भी अध्यक्ष को उपलब्ध कराई। संघर्ष समिति ने कहा कि उक्त वक्तव्य में ऊर्जा मंत्री ने आंदोलन समाप्त करने के लिए संघर्ष समिति का आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन से संबंधित सभी दंडात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त की जाएं। संघर्ष समिति ने आश्चर्य एवं अफसोस व्यक्त किया कि ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी उनका पूर्ण पालन नहीं हुआ है। इससे सरकार एवं प्रबंधन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान में भीषण गर्मी के दौरान बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को कार्य से पृथक किए जाने के कारण विद्युत व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा उपभोक्ताओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कर संविदा कर्मियों की बहाली की जानी चाहिए, ताकि बिजली कर्मी पूर्ण मनोयोग एवं समर्पण के साथ विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अपना योगदान दे सकें। संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से आग्रह किया कि वह संवाद, सहयोग एवं विश्वास का वातावरण स्थापित करते हुए सभी लंबित मामलों का न्यायोचित समाधान करे, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े और प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके। संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल में जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद, श्री चंद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी,के एस रावत, आर सी पाल सम्मिलित थे। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बाद मनमाने ढंग से हटाए गए लगभग 25,000 संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए - संघर्ष समिति : 2017 के निर्धारित मानकों के अनुरूप संविदा कर्मियों की संख्या बहाल करने की मांग: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा बिना कारण संविदा कर्मियों को सेवा से न हटाए जाने संबंधी दिए गए निर्देशों का स्वागत करते हुए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान निजीकरण की तैयारी और कथित "मैनपावर रेशनलाइजेशन" के नाम पर हटाए गए लगभग 25,000 संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लिया जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 36 तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 20 संविदा कर्मियों की व्यवस्था निर्धारित की गई थी। इसी मानक के आधार पर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था वर्षों तक सुचारु रूप से संचालित होती रही। संघर्ष समिति ने बताया कि अक्टूबर 2024 से इन निर्धारित मानकों के विपरीत बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाने का अभियान शुरू किया गया। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 में पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया की घोषणा की गई थी। संघर्ष समिति का आरोप है कि उसी के बाद निजीकरण की तैयारी के तहत संविदा कर्मियों की संख्या में कटौती प्रारंभ कर दी गई। संघर्ष समिति ने बताया कि नए टेंडरों में निर्धारित मानकों को दरकिनार करते हुए शहरी क्षेत्रों में 36 संविदा कर्मियों के स्थान पर मात्र 18.5 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मियों के स्थान पर केवल 12.5 कर्मियों की व्यवस्था का प्रावधान किया जा रहा है। राजधानी लखनऊ सहित जिन स्थानों पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग किया गया है वह शहरी क्षेत्र में संविदा कर्मियों की संख्या घटकर 7.5 कर दी गई है।इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में अनुभवी संविदा कर्मियों, जिनमें अनेक ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जो 20-25 वर्षों से विद्युत व्यवस्था के संचालन एवं रखरखाव में योगदान दे रहे थे, को सेवा से बाहर कर दिया गया है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 25,000 से अधिक संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि संविदा कर्मियों को 55 वर्ष की आयु में अनिवार्य रूप से हटाने का निर्णय भी पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अमानवीय है। अनेक ऐसे संविदा कर्मी, जिन्होंने बिजली व्यवस्था को बनाए रखने के दौरान दुर्घटनाओं में अपने हाथ-पैर तक गंवा दिए, उन्हें भी सेवा से बाहर कर दिया गया। संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि जब निगमों के शीर्ष अधिकारियों और प्रबंध निदेशकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, तब संविदा कर्मियों को 55 वर्ष की आयु में हटाने का औचित्य क्या है? संघर्ष समिति ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान विद्युत आपूर्ति में बाधाओं और फॉल्ट की घटनाओं में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि समस्या यह है कि फॉल्टों को तत्काल ठीक करने वाले अनुभवी संविदा कर्मियों की संख्या लगातार घटा दी गई है। परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की परेशानी झेलनी पड़ रही है और विद्युत कर्मचारियों पर भी कार्यभार असहनीय रूप से बढ़ गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि जब स्वयं ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बिना कारण किसी भी कर्मी को सेवा से न हटाया जाए, तब 2017 के निर्धारित मानकों के विपरीत किए गए टेंडरों की समीक्षा कर सभी हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में बहाल किया जाना चाहिए। साथ ही उपकेंद्रों एवं विद्युत वितरण व्यवस्था में आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित कर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाया जाना चाहिए। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि बिजली कर्मियों पर हमला करने वाले हमलावरों पर रासुका के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के कार्य में लगे अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों में हमलावरों पर रासुका के तहत कठोर कार्रवाई की मांग: फील्ड पर कार्य कर रहे अभियंताओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव इंजीनियर जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए अभियंता एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारी दिन-रात धरातल पर कार्य कर रहे हैं। फील्ड पर विभागीय कार्य करने के दौरान अराजक तत्वों द्वारा ड्यूटी कर रहे अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की टीम पर गाली गलौज, मारपीट एवं जानलेवा हमले किये जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में बिजली कर्मी गंभीर रुप से घायल हो रहे हैं, इन मारपीट की घटनाओं से पूरे प्रदेश के कर्मचारियों एवं अभियंताओं में भय व्याप्त हो गया है। दिनांक 27 मई 2026 को लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र में रेड टीम पर ड्यूटी के दौरान हमलावरों द्वारा घेरकर बेलचा से जानलेवा हमला किया गया तथा हमलावरों द्वारा बिजली कर्मियों को कुत्तों से भी कटवाया गया। इसी तरह दिनांक 26 मई 2026 को राजधानी लखनऊ के मध्य क्षेत्र में चैपटिया विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत पीक आवर्स में बिजली चोरी रोको अभियान के अंतर्गत गई रेड टीम पर बिजली चोरी में संलिप्त व्यक्तियों द्वारा इकट्ठा होकर टीम पर हमला किया। जिसमें एक संविदा कर्मी को गंभीर चोटें आईं। इसी प्रकार 27 मई 2026 को जनपद शामली के केराना में विभागीय टीम को बंधक बनाकर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें कर्मियों को गर्दन एवं सीने में गंभीर चोटें आई हैं। इस प्रकार की मारपीट की घटनाएं प्रदेश के लगभग सभी जनपदों में घटित हो रही हैं लेकिन ऊर्जा प्रबंधन की ओर से फील्ड पर कार्य कर रहे अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की सुरक्षा के संबंध में कोई भी ठोस कार्य नहीं किया जा रहा है। और तो और घटना के बाद संबंधित थाने में एफआईआर लिखाने के लिए भी सभी बिजली कर्मियों को एकजूट होना पड़ता है, तब जाकर एफआईआर लिखी जाती है। एफआईआर लिखने के उपरांत हमलावरों की गिरफ्तारी तक नहीं हो रही है। जिससे हमलावरों के हौसलें बुलंद एवं बिजली कर्मियों में भय का माहौल व्याप्त है। इस तरह की सभी घटनाओं पर त्वरित रोक लगाने हेतु संघ के महासचिव ने पावर कॉरपोरेशन शीर्ष प्रबंधन को पत्र लिख कर मांग की है कि 1. फील्ड में कार्य कर रहे अभियंताओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए। इस हेतु शीर्ष ऊर्जा प्रबंधन स्तर से समस्त जिला प्रशासन को तत्काल पत्र के माध्यम से कॉर्पोरेशन व शासन स्तर से निर्देश जारी किया जाए। 2. बिजली कर्मियों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2018 से शासन स्तर पर लंबित पावर सेक्टर इम्प्लाइज प्रोटेक्शन एक्ट को लागू कराया जाए। 3. दुर्भाग्यवश यदि किसी भी अभियंता या उनके अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटना घटित होती है तो तत्काल संबंधित डिस्काॅम के प्रबंध निदेशक, संबंधित कमिश्नर/जिलाधिकारी/पुलिस अधीक्षक से वार्ता कर रासुका जैसी गंभीर धाराओं में हमलावरों की गिरफ्तारी सुनिश्चित कराई जाए। 4. पाॅवर कार्पोरेशन स्तर पर प्रदेश भर में हो रही सभी मारपीट की घटनाओं को संकलित कर उन पर कृत कार्यवाही की समीक्षा की जाए। 5. शीर्ष ऊर्जा प्रबंधन स्तर पर वीडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से की जाने वाली सभी समीक्षा बैठकों में मारपीट की घटनाओं को एजेंडे पर सम्मिलित करते हुए अग्रिम कार्यवाही की जाए। संघ ने माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath से मांग की है कि अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों को रोकने के लिए शासन स्तर पर प्रभावी कार्यवाही करायी जाये, जिससे बिजली कर्मी बिना किसी भय के प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहें। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @ChairmanUppcl @Uppolice @dgpup @lkopolice @LkoCp @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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इस भीषण गर्मी में लखनऊ वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पीक अवर्स में लखनऊ मध्य क्षेत्र लखनऊ की रेड टीम द्वारा चौपटिया विद्युत उपकेंद्र के एरिया में बिजली चोरी रोकथाम हेतु सघन अभियान चला गया। इस समय पूरे प्रदेश के बिजली कर्मी अपनी क्षमता से कई गुना अधिक कार्य कर प्रदेश की जनता को इस भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए धरातल पर पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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राजधानी लखनऊ के जानकीपुरम में आज शाम 6 बजे जूनियर इंजीनियर अशोक कुमार पर उपभोक्ता और उसके सहयोगियों ने जानलेवा हमला किया। इस घटना में उपभोक्ता ने जूनियर इंजीनियर को कुत्ते से कटवाए भी। इस हमले में जूनियर इंजीनियर जख्मी हो गया। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, राजधानी लखनऊ में कानून का राज समाप्त हो गया है, कानून का किसी को डर नहीं है, अपराधी बेखौफ खुलेआम घूम रहे हैं, एक लोकतांत्रिक देश में इस प्रकार की हिंसा कतई बर्दाश्त करने योग्य नहीं है, अगर प्रदेश में सरकारी कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता का क्या हाल होगा। अगर सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर ही इस प्रकार से हिंसा का शिकार हो और उस पर जानलेवा हमला हो तो सोचिए कैसे इस प्रदेश की बिजली व्यवस्था चल पाएगी। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि इस घटना को संज्ञान में लेते हुए तत्काल हमलावारो को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जो एक नजीर बने और बिजली कर्मचारियों पर हमला करने से पहले कोई भी अराजक तत्व 10 बार सोचें। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @dgpup @Uppolice @lkopolice @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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माननीय मुख्यमंत्री जी पावर कारपोरेशन के अभियंता, कर्मचारी, संविदा कर्मचारी अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं, बिजली कर्मी बिना रेस्ट के दिन रात कार्य कर प्रदेश की बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने का काम कर रहे हैं, वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है। पावर कारपोरेशन का प्रबंध 3 साल से बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न पर उत्पीड़न कर रहा है और उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, किसी भी स्तर पर पिछले 3 साल से कर्मचारियों से ना तो माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा वार्ता की गई है और ना ही पावर कारपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन द्वारा वार्ता की जा रही है, पावर कारपोरेशन में शीर्ष स्तर पर तानाशाही चरम पर है। राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए। पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकल गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 नोटिस देकर निर्दोष अभियंताओं व कर्मचारियों के वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं। आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी आपसे अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वर्टिकल व्यवस्था को समाप्त किया जाए ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी द्वारा 3 दिसंबर 2022 तथा 19 मार्च 2023 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते के बावजूद आज भी उत्पन्न की कार्रवाई में वापस नहीं ली गई है, उसके अतिरिक्त बिजली कर्मियों पर लगातार उत्पीड़न की कार्रवाई की जा रही है इन सब उत्पीड़न कारवाहियों के विरोध में आज बाबा विश्वनाथ की पावन धरती वाराणसी में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया। माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी और मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध किया है कि ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित करने के लिए बिजली कर्मचारियों पर की जा रही समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को वापस लिया जाए। जिससे सभी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पुरजोर प्रयास करते रहे। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में वाराणसी में बिजली कर्मियों की जनजागरण रैली:बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर निर्बाध विद्युत आपूर्ति की कार्ययोजना बनाने की मांग: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों बिजली कर्मियों ने वाराणसी के भिखारीपुर स्थित पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर विशाल विरोध सभा एवं जनजागरण रैली आयोजित की। सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि प्रबंधन की मनमानी नीतियों, निजीकरण की जल्दबाजी तथा लगातार बढ़ते उत्पीड़न के कारण प्रदेश की बिजली व्यवस्था गंभीर संकट की ओर बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उपभोक्ताओं के हितों की वास्तविक चिंता है, तो बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेकर कर्मचारियों को विश्वास में लेते हुए भीषण गर्मी में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की ठोस कार्ययोजना तत्काल बनाई जाए। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा तापीय परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने, तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग (TBCB) के जरिए किए जा रहे निजीकरण के प्रयास न तो बिजली व्यवस्था के हित में हैं और न ही उपभोक्ताओं के। उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा एवं आगरा में निजी कंपनियों के कार्यों को लेकर उपभोक्ताओं की लगातार मिल रही शिकायतें यह साबित करती हैं कि निजीकरण से उपभोक्ताओं की समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ी हैं। संघर्ष समिति ने संबंधित निजी कंपनियों की जवाबदेही तय करने तथा करार उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की। सभा में यह भी कहा गया कि 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाहियां , उन पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानों पर किए गए स्थानांतरण तथा अन्य दमनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए। संघर्ष समिति ने 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने की मांग दोहराई। संघर्ष समिति ने कहा कि डाउनसाइजिंग एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को कार्यमुक्त किया गया है, जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है। संघर्ष समिति ने सभी संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली, दूरस्थ स्थानांतरणों की वापसी तथा बहाली के बाद भी जारी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने की मांग की। साथ ही आंदोलन से जुड़े सभी एफआईआर वापस लेने, स्टेट विजिलेंस जांच समाप्त करने तथा पदाधिकारियों को लक्षित कर की जा रही कार्रवाई रोकने की भी मांग उठाई गई। संघर्ष समिति ने मई 2025 में किए गए सेवा नियमों के संशोधन को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए कहा कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना सफाई का अवसर दिए सेवा से बर्खास्त करने का प्रावधान पूरी तरह अलोकतांत्रिक एवं कर्मचारी विरोधी है। संघर्ष समिति ने फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर बड़े पैमाने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा बिजली कर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्रवाइयों को तत्काल बंद करने की मांग की। इसके अतिरिक्त ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने पर अभियंताओं एवं जूनियर इंजीनियरों से वसूली के अवैधानिक आदेश को भी तत्काल वापस लेने की मांग की गई। संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता, किसानों एवं उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था को बचाने का आंदोलन है। निजीकरण से जहां उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, वहीं सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही भी प्रभावित होगी। इसलिए सभी नागरिकों से इस जन-जागरण अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की गई। संघर्ष समिति ने संकल्प व्यक्त किया कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंदोलन के दौरान भी उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रतिबद्ध है तथा निजीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष निरंतर जारी रखेंगे। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India
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राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के समस्त जनपदों में बिजली कर्मी उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए दिन रात फील्ड पर कार्य कर रहे हैं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
लखनऊ मध्य क्षेत्र के अंतर्गत 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र एप्ट्रॉन क्षेत्र में पीक आवर्स के दौरान विद्युत चोरी रोकने हेतु विशेष चेकिंग एवं अभियान चलाया गया। अभियान के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में सघन निरीक्षण कर अनियमितताओं की जांच की गई तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं वैध विद्युत उपयोग हेतु जागरूक किया गया। विद्युत चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है। “बिजली चोरी रोकें — सुरक्षित एवं बेहतर विद्युत सेवा में सहयोग करें।”@myogioffice @aksharmaBharat @CMOfficeUP @MVVNLHQ @MVVNLmd @mduppcl @ChairmanUppcl @UPPCLLKO @ashish_for_u @UppclMedia
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भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज लखनऊ सेंट्रल जोन के 33/11 KV उपकेंद्र UPTRON के 11 KV टिकेटगंज फीडर पर रात्रि 10:00 बजे से पीक अवर्स मे रेड टीम के साथ सघन पेट्रोलिंग अभियान चलाया गया। 2 घंटे के सघन पेट्रोलिंग अभियान के दौरान ट्रांसफार्मर, लाइनौ का निरीक्षण का किया गया तथा उपभोक्ताओं से बिजली चोरी न करने की अपील की। इस अभियान के दौरान फीडर पर 15 अंपायर करंट का विद्युत भार कम हुआ। राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के समस्त जनपदों में बिजली कर्मी उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए दिन रात फील्ड पर कार्य कर रहे हैं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है। पावर कारपोरेशन के प्रबंधन के मनमानी तरीके से राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए। पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं। आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त — जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, बिजली कर्मी सड़कों पर उतरने को मजबूर: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन में लागू की गई तथाकथित वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था एवं अनुभवी संविदा कर्मियों की छटनी ने राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। बिजली व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता के नाम पर लागू की गई यह व्यवस्था आज उपभोक्ताओं, बिजली कर्मियों और स्वयं विभागीय कार्यप्रणाली के लिए गंभीर संकट का कारण बन चुकी है। संघर्ष समिति ने कहा कि पहले किसी क्षेत्र की बिजली समस्या के लिए संबंधित जेई अथवा एसडीओ सीधे जिम्मेदार होते थे, जिससे उपभोक्ताओं को त्वरित समाधान मिलता था। लेकिन अब कार्यों को अलग-अलग विंगों में बाँट देने से जवाबदेही समाप्त हो गई है। उपभोक्ता यह तक नहीं समझ पा रहा कि उसकी समस्या का वास्तविक जिम्मेदार अधिकारी कौन है। नई व्यवस्था में शिकायत निस्तारण को पूरी तरह 1912 एवं ऑनलाइन पोर्टल पर निर्भर बना दिया गया है। शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं, लेकिन उनका समाधान समय पर नहीं हो रहा। आम जनता घंटों बिजली कटौती, गलत बिलिंग और तकनीकी समस्याओं से परेशान है जबकि जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी फाइलों और पोर्टलों के पीछे छिपे हुए हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि ग्राउंड लेवल पर समन्वय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। बिलिंग टीम अलग, मीटर टीम अलग और लाइन स्टाफ अलग होने के कारण एक छोटे से कार्य के लिए उपभोक्ताओं को कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। “Faceless System” के नाम पर ऐसी व्यवस्था बना दी गई है जिसमें जनता को पता ही नहीं चल रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी कौन है।इससे उपभोक्ताओं और विभाग के बीच संवादहीनता तेजी से बढ़ी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में नए विद्युत संयोजन समय से नहीं मिल रहे हैं, मीटर रीडिंग में भारी देरी हो रही है तथा हजारों उपभोक्ताओं के बिल समय से जनरेट नहीं हो पा रहे हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में तकनीकी खामियों, पूरी विफलता, बैलेन्स मिसमैच तथा गलत बिलिंग जैसी समस्याओं ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि शीर्ष प्रबंधन पूरी तरह जमीनी सच्चाइयों से कटा हुआ है और तुगलकी निर्णय थोपकर बिजली व्यवस्था को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। प्रदेश की जनता बिजली संकट से त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं बिजली कर्मचारी अत्यधिक कार्यभार, संसाधनों की कमी और उत्पीड़नात्मक नीतियों के कारण मानसिक दबाव में कार्य करने को विवश हैं। संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की विफल व्यवस्था को तत्काल वापस नहीं लिया गया तथा बिजली कर्मियों और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कर अभियंताओं को विश्वास में लेकर व्यावहारिक व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बिजली कर्मी अब सड़कों पर उतरकर प्रबंधन की मनमानी नीतियों का लोकतांत्रिक विरोध करेंगे। संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि बिजली व्यवस्था को बचाने, उपभोक्ताओं को राहत देने तथा ऊर्जा निगमों में जवाबदेही और समन्वय बहाल करने हेतु तत्काल हस्तक्षेप किया जाए, अन्यथा स्थिति और विस्फोटक होगी जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी। उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जन जागरण अभियान के अंतर्गत आज विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर और प्रयागराज में सभा हुई। सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम,जवाहर लाल विश्वकर्मा, प्रेम नाथ राय ने संबोधित किया। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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कर्मचारियों को विश्वास में लिए बिना शीर्ष प्रबंधन के मनमाने निर्णयों से उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है : निजीकरण के फैसले वापस लिए जाएं, उत्पीड़न समाप्त हो तथा बिजली व्यवस्था सुधारने हेतु तत्काल कार्ययोजना बनाई जाए: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि भीषण गर्मियों के दौरान जब उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग देश में सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई है, ऐसे समय में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन का बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं के प्रति असहिष्णु रवैया तथा एकतरफा और मनमाने निर्णय बिजली व्यवस्था को गंभीर संकट की ओर धकेल रहे हैं। संघर्ष समिति ने अत्यंत दृढ़ शब्दों में कहा कि आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ेगी तथा बिजली की मांग में और अधिक वृद्धि होगी। ऐसी स्थिति में बिजली व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि पावर कॉरपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन और अध्यक्ष तत्काल कर्मचारियों के प्रति टकरावपूर्ण रवैया छोड़ें तथा संघर्ष समिति से सकारात्मक संवाद प्रारंभ करें। बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं के साथ बैठकर बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु तत्काल प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और अभियंता देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का लगातार कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। बिजली कर्मियों की योग्यता, अनुभव और कार्यक्षमता में कोई कमी नहीं है, लेकिन वर्तमान प्रबंधन ने कभी भी कर्मचारियों को विश्वास में लेने का प्रयास नहीं किया। वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसे मनमाने फैसले लागू किए गए तथा 20-25 वर्षों का अनुभव रखने वाले संविदा कर्मियों को कार्य से बाहर कर दिया गया। परिणामस्वरूप आज उपभोक्ता परेशान है और उसे यह तक स्पष्ट नहीं है कि उसका कार्य कौन करेगा। संघर्ष समिति ने कहा कि राजधानी लखनऊ तक में बिजली अव्यवस्था के विरोध में आम जनता का आक्रोश प्रतिदिन सामने आ रहा है। स्थिति यह है कि राजधानी के विधायक तक ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखने और धरने पर बैठने को मजबूर हैं। यदि समय रहते कर्मचारियों को विश्वास में लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आगामी दिनों में प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मचारी उपभोक्ताओं के हित में बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने हेतु हमेशा सहयोग देने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रबंधन सहयोग के बजाय उत्पीड़न का रास्ता अपना रहा है। वर्तमान समय की आवश्यकता है कि सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ली जाएं तथा उपभोक्ताओं के व्यापक हित में कर्मचारियों को विश्वास में लेकर कार्य किया जाए। निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति की सभा अनपरा ताप बिजलीघर में आयोजित की गई। सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, मोहम्मद वसीम, माया शंकर तिवारी एवं विशंभर सिंह ने संबोधित किया। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त न किए जाने से बिजली कर्मियों में बढ़ रहा है असंतोष : निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में गाजीपुर और वाराणसी में जोरदार विरोध प्रदर्शन: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न लिए जाने से कर्मचारियों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। निजीकरण और दमनात्मक नीतियों के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज गाजीपुर और वाराणसी में संघर्ष समिति द्वारा जोरदार विरोध सभाएं आयोजित की गईं। संघर्ष समिति ने कहा कि प्रबंधन की नाकामी के कारण भीषण गर्मी के दौरान प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमराने की स्थिति में पहुंच गई है। इसके बावजूद प्रबंधन बिजली कर्मियों का सहयोग लेने के बजाय उत्पीड़न और टकराव का रास्ता अपना रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना रवैया है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि एक ओर डाउनसाइजिंग के नाम पर 20-25 वर्षों से बिजली व्यवस्था संभाल रहे अत्यंत अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर नियमित कर्मचारियों के पद समाप्त कर दिए गए हैं। इससे बिजली व्यवस्था में भारी अव्यवस्था पैदा हो गई है और उपभोक्ताओं को दर-दर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि प्रबंधन वास्तव में गर्मियों में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना चाहता है तो उसे तत्काल विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति से वार्ता करनी चाहिए तथा टकराव का रास्ता छोड़कर बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए। संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा कि बिजली कर्मचारियों पर की गई अधिकांश उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां किसी कदाचार के कारण नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण की गई हैं। यह सीधे-सीधे कर्मचारियों का दमन और उत्पीड़न है, जिसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। आज गाजीपुर और वाराणसी में आयोजित विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, माया शंकर तिवारी तथा मोहम्मद वसीम ने मुख्य रूप से संबोधित किया। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी 19 मार्च 2023 के समझौते का पालन करो। उत्पीड़न की कार्यवाही वापस लो। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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बिजली कर्मचारियों के उत्पीड़न के विरोध में जन जागरण अभियान जारी : ऊर्जा निगमों में औद्योगिक शान्ति बनाए रखने हेतु समझौतों का पालन सुनिश्चित किया जाय: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि ऊर्जा निगमों में औद्योगिक शांति, पारस्परिक सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु यह आवश्यक है कि श्रमिकों एवं कर्मचारियों के साथ हुए समझौतों का पालन सुनिश्चित किया जाय तथा कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशों के अनुसार समस्याओं का समाधान संवाद और सहभागिता के माध्यम से निकाला जाए तथा कार्यस्थलों पर सुरक्षा, स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। विकास नीतियों में श्रमिक एवं कर्मचारी हितों का संतुलित समावेश करते हुए सभी पक्षों के बीच लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप पारस्परिक सम्मान बनाए रखना समय की आवश्यकता है। इन्हीं सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि श्रम संगठनों के साथ हुए समझौतों का समय से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि ऊर्जा निगमों में सौहार्दपूर्ण वातावरण और औद्योगिक शांति कायम रह सके। संघर्ष समिति ने विशेष रूप से कहा है कि माननीय ऊर्जा मंत्री की उपस्थिति में 3 दिसंबर 2022 तथा 19 मार्च 2023 को हुए समझौतों का पूर्ण पालन कराया जाए और बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं की लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए तथा बिजली कर्मियों पर मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाय। साथ ही संघर्ष समिति ने मांग की है कि बिजली कर्मचारियों और ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक एवं दमनात्मक कार्यवाहियां तत्काल बंद की जाएं। कर्मचारियों के विरुद्ध की गई अनुचित अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लेकर विश्वास और संवाद का वातावरण बनाया जाए, जिससे कर्मचारी निर्भीक होकर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने में अपना योगदान दे सकें। संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र जैसे संवेदनशील एवं जनहित से जुड़े विभाग में टकराव नहीं बल्कि संवाद, सहयोग और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देना ही प्रदेश और उपभोक्ताओं के हित में होगा। उत्पीड़न के विरोध में चलाए जा रहे जन जागरण अभियान के अंतर्गत आज देवरिया एवं आजमगढ़ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की विरोध सभाएं आयोजित की गईं। सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, चंद्रभूषण उपाध्याय एवं मोहम्मद वसीम ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद कर संवाद और समझौते के रास्ते पर आगे बढ़ना ही प्रदेशहित में है। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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बिजली कर्मियों के उत्पीड़न के विरोध में मध्यांचल मुख्यालय पर हुई विरोध सभा। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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