हिंदुओं के बीच अपने लीगों को संबोधित करने के लिए कुछ बोले जाने वाले शब्द 😡😡
हम खुद ही एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए कितने नामों से पुकारते हैं
भीमटे, नीलचट्टे, पोंगा पंडित, आरक्षणजीवी, चुनमंगे, मुग़ाहलपुत्र ,चमारू, भंगी, जाटू, बनिया, पुरबिया, बिहारी, मद्रासी, चिंकी…
और भी न जाने कितने।
सोचिए…
जब अपने ही लोगों को हम ऐसे शब्दों से बुलाते हैं,
तो फिर शिकायत क्यों कि हम एक नहीं हैं?
एकता नारे से नहीं बनती।
एकता सम्मान से बनती है।
जिसे तुम छोटा समझते हो
वह भी उसी सभ्यता, उसी संस्कृति और उसी परंपरा का हिस्सा है।
अगर सच में शक्ति चाहिए
तो सबसे पह अपने शब्द बदलो।
जो नाराज़ है उसे गले लगाओ।
जो अलग हो गया है उसे वापस बुलाओ।
याद रखो
1 1 हमेशा 2 नहीं होते
जब दिल जुड़ते हैं तो वही 11 बन जाते हैं।
अगर हमने सच में अपने अहंकार को छोड़ा
तो देखना…
सिर्फ 10 साल में
एक ही आवाज़ गूंजेगी
यह घुट्टी मत पिलाना के यह हिंदू नहीं मानते , इन्होंने अत्याचार किया हजारों साल तक ब्लाह ब्लाह सब तुम्हारे ख़ुद के ही फैलाए चुटियापे है बाक़ी कुछ नहीं ,
हर हर महादेव।