सामान्यतः मैं किसी व्यक्ति की सोशल मीडिया पर आलोचना नहीं करता। स्वामी रामदेव जी जिस युट्यूबर, अवध ओझा के साथ इस शुभ संकल्प को साकार करने का स्वप्न संजो रहे हैं, उस युट्यूबर को अपने सनातनी होने पर अपराधबोध है, शर्म है, हीनताबोध है।
इस युट्यूबर ने अपने यूट्यूब चैनल पर हिंदू समाज को कलंकित करने का एक अवसर नहीं छोड़ा है, इन्होंने इस्लाम के विस्तार के लिए उसकी आक्रामकता-कट्टरता को मूल कारक न बताकर उसके भाईचारे व एकेश्वरवाद को प्रभावी बताया है। इसके कई वीडियो हिंदू-घृणा से भरे हुए हैं, उन्हें सुनकर युवाओं को अपने देश की संस्कृति, परंपरा, जीवन-मूल्यों व आदर्शों के प्रति गौरवबोध नहीं जागृत होता, बल्कि हीनता की ग्रंथि विकसित होती है।
स्वामी जी के पास योग्य लोगों की टीम है, अकूत संसाधन है, वे केवल इतना भर कर दें कि अपनी एक टीम गठित कर इस युट्यूबर के यूट्यूब वीडियो खंगाल लें, उन्हें सुनें और सुनकर किसी व्यक्ति को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लें। स्वामी रामदेव के शुभचिंतकों का मैं आह्वान करता हूँ कि वे उन्हें सावधान करें। आप जानते हैं कि मैं इतिहास का अध्येता हूँ। उसी क्रम में मुझे इस युट्यूबर के यूट्यूब लिंक पर जाने का अवसर मिला। मैंने इतिहास की पाठ्यपुस्तकों व पाठ्यक्रमों पर अनेक लेख लिखे हैं। पाञ्चजन्य, ऑर्गेनाइजर व दैनिक जागरण में उनमें से कई प्रकाशित हो चुके हैं। मैं पूरी प्रामाणिकता से कह रहा हूँ कि इस कथित इतिहासकार या कोचिंग संचालक की इतिहास-दृष्टि वामपंथियों से भी अधिक विकृत, एकांगी और सनातन-विरोधी है। आप यह जानकर आश्चर्य करेंगें कि इस युट्यूबर ने तैमूर लंग, नादिरशाह, अब्दाली जैसों के भी प्रशस्ति-गायन किए हैं। जिस संकल्प की नींव में ही बुरे लोग हों, वह शुभ व सार्थक भी हो तो सफल नहीं हो सकता! स्वामी जी हिंदू समाज आपका ऋणी है, प्रचार के लिए ऐसे-वैसों को अपना सारथि न बनाएँ। सजग रहें, सावधान रहें, छानबीन करें, फिर निर्णय लें।
_प्रणय कुमार जी