कुम्भ के समय की बात है मेरी दुकान पर दो बाबा आये शीतलन धाम के आसपास के थे कहीं से उम्र लगभग 20-22 वर्ष या आसपास....
आये बोले बाबा को दे दो कुछ बहुत दूर जाना है
कुम्भ से लौटे हैं....!!
वैसे तो मै कभी पूछता नहीं कि कहाँ से हो क्या नाम है लेकिन जस दिन पता नहीं किस मूड मे था पूछ लिया कि आधार दिखाओ तो ही आपको दूंगा जो देना होगा....
उनके पास आधार नहीं था। बोला हिन्दू हूँ झूठ नहीं बोलूंगा, मै बोला ठीक है तीन मंत्र सुना दीजिये कोई भी या फिर सम्पूर्ण हनुमान चालीसा ये भी कर पाने मे असमर्थ थे वे।
अब मुझे क्रोध आ रहा था मै बोला मै कैसे मान लूँ कि तुम हिन्दू हो तुम संत हो बाबा हो ज़ब तुम्हे मंत्र तक नहीं याद है तुम जैसे के कारण जो सही के बाबा है उन्हें सम्मान न मिल पाता।
मैंने बोला फोन मिलाओ घर अपने बोला घर पर फोन नहीं है मै बोला किसी का तो मिलाओ तो उसने गांव के प्रधान का फोन मिलाया बात हुआ हिन्दू ही थे दोनों, फिर उन्हें समझाया मैंने कि अगर ये सब करना है तो मंत्र वगैरह याद रखो नहीं तो पीटे जाओगे कहीं.... तबसे उनमे से एक तीन बार आया लेकिन अब उसने मंत्रो को कंठस्थ कर लिया है दूसरा वाला उस दिन के बाद से बाहर निकल कर ये सब करना बंद कर दिया है।
जाति का उल्लेख नहीं करूंगा मै उसके।
आधे बाबा गैर ब्राह्मण है उधर
जो ढंग से एक मंत्र नहीं पढ़ पाते
फिर भी रंडी रोना निरंतर चलता रहता है इन सबका