आप अमित यादव हैं.. तो ऐसा लिखकर देश द्रोह कर रहे हैं.. संभले रहियेगा..
यूपी में मातृ मृत्यु दर बढ़ी
अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, उत्तर प्रदेश अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में आयोजित उत्तर प्रदेश की मातृ मृत्यु दर (MMR) में 141 से बढ़कर 154 होने पर चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने कहा मातृ एवं नवजात मृत्यु के लगभग 40 प्रतिशत मामले प्रसव के दिन तथा प्रसव के प्रथम सप्ताह में होते हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण इंट्रापार्टम केयर (प्रसवकालीन देखभाल) को सुदृढ़ बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए स्टाफ नर्सों की क्षमता वृद्धि, जटिलताओं के प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण तथा नर्स मेंटरिंग कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव ने लेबर रूम प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करने, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सभी क्लिनिकल स्टाफ को मातृ एवं नवजात जटिलताओं के प्रबंधन में प्रशिक्षित करने पर बल दिया। उन्होंने जिला स्तर पर हब एवं स्पोक मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाने, चयनित उच्च प्रसव केंद्रों, सी-इमॉनक (CeMONC) एवं बी-इमॉनक (BeMONC) संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के विस्तार तथा नियमित निगरानी एवं मेंटरिंग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु की रिपोर्टिंग एवं गोपनीय मृत्यु समीक्षा (Confidential Death Review) प्रणाली को मजबूत किया जाना आवश्यक है। इसके लिए रिपोर्ट किए गए मामलों की स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा गहन समीक्षा कराई जाएगी ताकि मृत्यु के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
बैठक में दूरस्थ एवं दुर्गम जनपदों में स्वास्थ्य मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहन आधारित उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। श्री घोष ने कहा कि राज्य का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के सबसे वंचित वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी बाधा के पहुंचें तथा अनावश्यक रेफरल की स्थिति न बने।
उन्होंने चयनित सी-इमॉनक/एफआरयू एवं बी-इमॉनक केंद्रों को शीघ्र क्रियाशील बनाने, मातृ एवं नवजात सेवाओं को एकीकृत रूप से विकसित करने तथा सभी सी-इमॉनक केंद्रों पर ऑब्स्टेट्रिक आईसीयू/एचडीयू के साथ एसएनसीयू/एमएनसीयू/एनआईसीयू जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया। इसी प्रकार बी-इमॉनक केंद्रों पर एचडीयू एवं एनबीएसयू सुविधाओं के विकास की आवश्यकता बताई।
उच्च जोखिम गर्भावस्था (High Risk Pregnancy) वाली महिलाओं के लिए सुनिश्चित रेफरल प्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर समय से पहचान, नामित स्वास्थ्य संस्थान तथा पूर्णतः सुसज्जित एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि चिन्हित सी-इमॉनक एवं बी-इमॉनक केंद्रों पर आवश्यक विशेषज्ञों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी तथा उनके प्रशिक्षण, गुणवत्ता निगरानी एवं मेंटरिंग की व्यवस्था की जाएगी।
श्री घोष ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों में गुणवत्तापूर्ण डेटा रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि डेटा अपलोडिंग एवं डेटा गुणवत्ता में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए कार्यक्रम अधिकारियों, तकनीकी सहयोग इकाइयों एवं विशेषज्ञों के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा। साथ ही डेटा विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा ताकि समय रहते सुधारात्मक निर्णय लिए जा सकें।
बैठक में मिडवाइफरी कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा संचालित संरचित मिडवाइफरी कार्यक्रम के साथ-साथ राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित मिडवाइफरी कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए अल्पावधि कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जाने पर विचार किया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव ने विकास सहयोगी संस्थाओं से अपेक्षा की कि वे प्रत्यक्ष सेवा प्रदाता की भूमिका निभाने के बजाय राज्य की मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाने, क्षमता निर्माण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं मेंटरिंग पर अधिक ध्यान दें, ताकि भविष्य में भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं स्थायित्व सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में विभिन्न साझेदार संस्थाओं एवं विशेषज्ञों द्वारा मातृ, नवजात एवं शिशु मृत्यु दर में तेजी से कमी लाने हेतु अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक रणनीतियों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. पिंकी जोवेल, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. सारिका मोहन, वीसी केजीएमयू प्राे. सोनिया नित्यानंद, गेट्स फाउंडेशन से डॉ. देवेंद्र खंडाइत, डॉ. गुंजन तनेजा, यूपीटीएसयू से जॉन एंथोनी, स्वास्थ्य विभाग के सलाहकार डॉ. हिमांशु भूषण, संतोष मैथ्यू उपस्थित थे।