कहते हैं उज्जैन में एक चरवाहा रात में रास्ता भटक गया। डर के सन्नाटे में उसने महाकाल को पुकारा
और तभी अंधेरे में एक तेज उजाला हुआ…
एक साधु प्रकट हुए, उसे सुरक्षित गाँव तक पहुँचा दिया।
वह साधु कोई और नहीं, स्वयं महाकाल थे।
भक्त की पुकार व्यर्थ नहीं जाती।
🔱 जय श्री महाकालेश्वर