A Believer of Secularism, Humanity. Reading esp Short Stories,Occasional Writing, History,Movies,Music, Sports,Quizzes.

Joined November 2011
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28 Sep 2021
'Coffee Times' In the leisure of a summer noon alone With a cup of piping hot coffee along Takes me to the times bygone, The bitterness mixes with the memories, And the taste lingers on. Vijay
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Or a speck of sand ( not even that) in the universe.
all in all you're just another brick in the wall.
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He is my favourite player.
LEGO game idea: Building celebrities, two films at a time.
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He is in the Chaddi party now.
Jun 10
#WATCH | Delhi | Rajya Sabha MP Raghav Chadha performed a special pooja to mark PM Modi becoming India’s longest continuously serving elected Prime Minister.
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Many Hindi cinema actors, filmmakers of 70s and 80s decades who were young at that time have now turned Sycophants, bigots in their old age, post 2014. Such disappointments they are/ were..now we have @SubhashGhai1 a new entrant into this hall of infame. But Why , Subhash why?
Jun 9
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: On Narendra Modi becoming India’s longest continuously serving Prime Minister, Film Director Subhash Ghai says, "I was born before India's independence.... Till 2014, the situation was so bad that there was unrest in our country. After PM Modi formed the government, the change I have seen is astonishing... No one has utilised technology as effectively as PM Modi... This is a big achievement..."
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Unfollowed him.
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This arrogance will be bad for them... didn't expect this . @INCKarnataka
Karnataka CM DK Shivakumar takes a bite of an apple and throws it into the crowd for them to eat! What a superstar! Charismatic CM!😎
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VIJAY retweeted
May 26
one no reservation journey in the railways will kick the nationalism out of your body.
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Also on Moral and empathy depreciation...
As a nation, we're slowly inching closer to a century none of us looked forward to. #RupeeDepreciation
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Whims and fancies of a King .
Did Udyog Bhawan HAVE to be demolished? Was it unsafe? Could we not have used it for something else?
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VIJAY retweeted
#GoSH - It’s back - A new puzzle will be up at 5PM IST every Saturday Check it out at 1across.org/gosh @ramkid @nirupamakotru @vijayshekhar @drippingashes @mnwsth #bollywood #song #rebus
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But sir, vo toh Congress wale din thay 🤔
T 5764 - AAAHHHH !! the good ol' days !
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They believed in the motto... Tap the source . 😁
Jun 5
Nagpur Boys Steal Taps Worth Rs 6.5 Lakh To Buy iPhones For Girlfriends ndtv.com/india-news/nagpur-b…
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Har taraf har jagha beshumar aadmi....☹️
Yesterday 274 people pushed for the summit of Mount Everest just to give their LinkedIn profile the edge. Horrendous. Video by Lakpa Tenjen Sherpa facebook.com/share/r/1CuoKUw…
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I think it's the grabbing of power in collusion with the Election commission and Supreme Court.
"Creo que la raíz de todos los males es el abuso de poder:. - Patricia Cornwell Buenas noches, buena gente
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Pure nostalgia...with @UdayanMukharjee . Kahan gaye vo log...? @schengalvarayan
Best day of Nifty, Sensex.. both hit UC in just few seconds.
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Falling ( failing) bridges se failing fevicol tak ka safar.
After fake paneer and fake synsodyne, Delhi is honoured to welcome fake "Fevicol". It simply doesn't work. Not sticking even a paper, not even sticking between fingers. 🤷
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Loved to read Sagar Sahab's journey of life and into the cinema world. And I resonate with his thoughts on films in recent times so much.
Replying to @PragyanM
The whole interview is as fine as this snippet. scroll.in/reel/837484/sagar-…
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बहुत ही दुःखद समाचार है, सुमनजी की एक अलग ही पहचान थी गायिकी में। काश उन्होंने काफी और भी गाया होता पर जो भी गाया दिल की छू गया । * श्रद्धांजलि
यूं ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना तेरी याद तो बन गई एक बहाना #सुमन #स्मृतियोंमें *सुमन कल्याणपुर होने के मायने*: सुमन कल्याणपुर का देहावसान भारतीय संस्कृति,.संगीत, सिनेमा जगत, और उसके चाहने वालों के लिए एक बेहद दुखद घटना है। सुमन कल्याणपुर हिंदी फिल्म और गैर फिल्मी संगीत के इतिहास में एक अविस्मरणीय हस्ताक्षर की तरह से याद की जाएंगी। पर हिंदी फिल्म संगीत में सुमन कल्याणपुर होना एक किस्म से त्रासदी भी रहा। 1954 में सुमन कल्याणपुर ने तलत महमूद के साथ जब अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया था, उस समय लता मंगेशकर गायकी के संगीत शिखर पर स्थापित हो गई थीं और आशा भोसले की कीर्ति यात्रा भी प्रारंभ हो चुकी थी, ऐसे में सुमन कल्याणपुर के लिए उस शिखर पर पहुंचना लगभग असंभव रहा लेकिन उससे बड़ी त्रासदी ये थी कि उनके अधिकतर गीत आम सुनने वालों को लता मंगेशकर के गाए लगते थे और उनके गाए बहुत से लोकप्रिय गीतों में अभी तक लोग आश्चर्य करते हैं की क्या यह लता की आवाज नहीं है। सिनेमाई राजनीति और सीमित अवसरों की बात छोड़ भी दी जाए तो भी अपने ही लोकप्रिय गीतों के लिए पहचान ना मिल पाना सुमन कल्याणपुर जैसी कलाकार के लिए एक बहुत बड़ी त्रासदी है। नियति की बात देखिये, सुमन कल्याणपुर ने जब अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया था तो लता जी स्टूडियो में आई थी और इस नई लड़की की गायकी की बहुत प्रशंसा की थी। लेकिन सुमन कल्याणपुर का होना हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास की एक सुखद घटना भी है। लता, शमशाद, गीता दत्त और आशा भोसले जैसी मधुर और लोकप्रिय आवाजों के बीच अपनी एक जगह बना पाना कोई आसान बात नहीं है। सुमन ने अपनी गायकी, मधुरता और कौशल से फिल्म संगीत में एक विकल्प दिया और खासकर जिस दौर में लता और रफी अपनी अनबन की वजह से साथ गा नहीं रहे थे, उस दौर में सुमन के रूप में निर्माताओं को, कलाकारों को, और हम सुनने वालों को, गायकी में लता का एक खूबसूरत विकल्प मिला। आज भी कितने ही ऐसे गीत हैं जिसमें अमूमन सुनने वाले गच्चा खा जाते हैं, और सुमन के स्वरों को पहचान नहीं पाते। जैसे बाद मुद्दत की ये घड़ी आई (जहां आरा), जूही की कली मेरी लाडली (दिल एक मंदिर), आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे (ब्रह्मचारी), मेरा प्यार भी तू है (साथी), मनमोहन मन में हो तुम्हीं (कैसे कहूं), या यूं ही दिल ने चाहा था (दिल ही तो है) जैसे गीत शामिल किया जा सकते हैं| मुख्य धारा में मिले अवसरों के बावजूद हिंदी फिल्म संगीत में सुमन कल्याणपुर का शिखर पर ना हो पाना एक और महत्वपूर्ण आयाम की ओर इशारा करता है। यह बात मुझे फिल्म संगीत के एक बड़े संगीतकार ने बताई थी की सुमन कल्याणपुर, लता और आशा की तरह गायकी के लिए कमिटेड नहीं थीं, परिवार और प्रोफेशन में बैलेंस बनाने में भी थोड़ी मुश्किल हो रही थी और एक दो बार ऐसा हुआ जब उन्होंने साथी गायकों, संगत वाले वाद्य कलाकारों और संगीतकारों को पूरे दिन इंतजार कराया और नहीं आईं। उस दिन के बाद उन संगीतकार ने सुमन कल्याणपुर को कभी नहीं गवाया। फिल्म संगीत में जिस तरह की नेटवर्किंग और कमिटमेंट की जरूरत होती है शायद सुमन वहां कमजोर थीं , जिसका नुकसान उनके पेशेवर करियर पर पड़ा। भारतीय संगीत और खासकर फिल्म संगीत के इतिहास में सुमन कल्याणपुर हो पाना आसान नहीं था। सुमन कल्याणपुर ने पूरी गरिमा से, स्वयं बिना विवादों में आए, इस सांगीतिक यात्रा में अपनी हिस्सेदारी से फिल्म संगीत को समृद्ध बनाया, और अपनी एक विशिष्ट जगह बनाई। एक सुखद पक्ष ये है कि जिस आवाज़ और सुरीली गायकी से हमने उन्हें जाना, वो वह रिकॉर्ड्स , रेडियो और प्लेटफॉर्म्स के साथ हमारी यादों में संरक्षित और सुरक्षित हैं, सदियों के लिए, और जब तक वे सुरक्षित हैं तब तक सुमन कल्याणपुर हिंदी मराठी, बंगाली, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में गाए अपने गीतों में, उन सुरों में, सांस लेती रहेंगी, और जिंदा रहेंगी, और हम सब की मधुर स्मृतियों में भी। नियति ने लता जी के साथ उन्हें भी ये कालजई गीत दिया था। यूं ही इस चमन की ज़ीनत रहेंगे रहे ना रहे हम, महका करेंगे बन के कली बनके सबा, बाग़े वफ़ा में
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दिल ने फिर याद किया ....
यूं ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना तेरी याद तो बन गई एक बहाना #सुमन #स्मृतियोंमें *सुमन कल्याणपुर होने के मायने*: सुमन कल्याणपुर का देहावसान भारतीय संस्कृति,.संगीत, सिनेमा जगत, और उसके चाहने वालों के लिए एक बेहद दुखद घटना है। सुमन कल्याणपुर हिंदी फिल्म और गैर फिल्मी संगीत के इतिहास में एक अविस्मरणीय हस्ताक्षर की तरह से याद की जाएंगी। पर हिंदी फिल्म संगीत में सुमन कल्याणपुर होना एक किस्म से त्रासदी भी रहा। 1954 में सुमन कल्याणपुर ने तलत महमूद के साथ जब अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया था, उस समय लता मंगेशकर गायकी के संगीत शिखर पर स्थापित हो गई थीं और आशा भोसले की कीर्ति यात्रा भी प्रारंभ हो चुकी थी, ऐसे में सुमन कल्याणपुर के लिए उस शिखर पर पहुंचना लगभग असंभव रहा लेकिन उससे बड़ी त्रासदी ये थी कि उनके अधिकतर गीत आम सुनने वालों को लता मंगेशकर के गाए लगते थे और उनके गाए बहुत से लोकप्रिय गीतों में अभी तक लोग आश्चर्य करते हैं की क्या यह लता की आवाज नहीं है। सिनेमाई राजनीति और सीमित अवसरों की बात छोड़ भी दी जाए तो भी अपने ही लोकप्रिय गीतों के लिए पहचान ना मिल पाना सुमन कल्याणपुर जैसी कलाकार के लिए एक बहुत बड़ी त्रासदी है। नियति की बात देखिये, सुमन कल्याणपुर ने जब अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया था तो लता जी स्टूडियो में आई थी और इस नई लड़की की गायकी की बहुत प्रशंसा की थी। लेकिन सुमन कल्याणपुर का होना हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास की एक सुखद घटना भी है। लता, शमशाद, गीता दत्त और आशा भोसले जैसी मधुर और लोकप्रिय आवाजों के बीच अपनी एक जगह बना पाना कोई आसान बात नहीं है। सुमन ने अपनी गायकी, मधुरता और कौशल से फिल्म संगीत में एक विकल्प दिया और खासकर जिस दौर में लता और रफी अपनी अनबन की वजह से साथ गा नहीं रहे थे, उस दौर में सुमन के रूप में निर्माताओं को, कलाकारों को, और हम सुनने वालों को, गायकी में लता का एक खूबसूरत विकल्प मिला। आज भी कितने ही ऐसे गीत हैं जिसमें अमूमन सुनने वाले गच्चा खा जाते हैं, और सुमन के स्वरों को पहचान नहीं पाते। जैसे बाद मुद्दत की ये घड़ी आई (जहां आरा), जूही की कली मेरी लाडली (दिल एक मंदिर), आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे (ब्रह्मचारी), मेरा प्यार भी तू है (साथी), मनमोहन मन में हो तुम्हीं (कैसे कहूं), या यूं ही दिल ने चाहा था (दिल ही तो है) जैसे गीत शामिल किया जा सकते हैं| मुख्य धारा में मिले अवसरों के बावजूद हिंदी फिल्म संगीत में सुमन कल्याणपुर का शिखर पर ना हो पाना एक और महत्वपूर्ण आयाम की ओर इशारा करता है। यह बात मुझे फिल्म संगीत के एक बड़े संगीतकार ने बताई थी की सुमन कल्याणपुर, लता और आशा की तरह गायकी के लिए कमिटेड नहीं थीं, परिवार और प्रोफेशन में बैलेंस बनाने में भी थोड़ी मुश्किल हो रही थी और एक दो बार ऐसा हुआ जब उन्होंने साथी गायकों, संगत वाले वाद्य कलाकारों और संगीतकारों को पूरे दिन इंतजार कराया और नहीं आईं। उस दिन के बाद उन संगीतकार ने सुमन कल्याणपुर को कभी नहीं गवाया। फिल्म संगीत में जिस तरह की नेटवर्किंग और कमिटमेंट की जरूरत होती है शायद सुमन वहां कमजोर थीं , जिसका नुकसान उनके पेशेवर करियर पर पड़ा। भारतीय संगीत और खासकर फिल्म संगीत के इतिहास में सुमन कल्याणपुर हो पाना आसान नहीं था। सुमन कल्याणपुर ने पूरी गरिमा से, स्वयं बिना विवादों में आए, इस सांगीतिक यात्रा में अपनी हिस्सेदारी से फिल्म संगीत को समृद्ध बनाया, और अपनी एक विशिष्ट जगह बनाई। एक सुखद पक्ष ये है कि जिस आवाज़ और सुरीली गायकी से हमने उन्हें जाना, वो वह रिकॉर्ड्स , रेडियो और प्लेटफॉर्म्स के साथ हमारी यादों में संरक्षित और सुरक्षित हैं, सदियों के लिए, और जब तक वे सुरक्षित हैं तब तक सुमन कल्याणपुर हिंदी मराठी, बंगाली, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में गाए अपने गीतों में, उन सुरों में, सांस लेती रहेंगी, और जिंदा रहेंगी, और हम सब की मधुर स्मृतियों में भी। नियति ने लता जी के साथ उन्हें भी ये कालजई गीत दिया था। यूं ही इस चमन की ज़ीनत रहेंगे रहे ना रहे हम, महका करेंगे बन के कली बनके सबा, बाग़े वफ़ा में
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How the godi media and PM had changed the narrative of no press conference by PM to Melody narrative. All in a day . And the public lapped it with social and tv media playing it in full flow. It was such a degraded moment in Indian diplomacy, never seen such a low so far.
Everyone has a short attention span these days. A lot of the media encourages it by changing track and not following up. So the general tendency now is to ignore any complaints - whether it is a stampede, water pollution, air pollution, NEET, etc - and relax in the knowledge that people will forget a few weeks later.
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