बीमा का असली सच - ग्राहकों के साथ लूट और बैंक स्टाफ का शोषण!
क्या आप जानते हैं?
👉 बैंक द्वारा बेची गई 95% बीमा पॉलिसियाँ कभी रिन्यू नहीं होतीं।
मतलब साफ है कि यह प्रोडक्ट ग्राहक के फायदे के लिए नहीं, बल्कि केवल मैनेजमेंट और बीमा कंपनियों की जेब भरने के लिए बेचे जाते हैं।
अब देखिए यह लूट का हिसाब:
❗️ग्राहक: सबसे बड़ा पीड़ित। उसे जबरदस्ती बीमा खरीदवाया जाता है।
❗️ब्रांच स्टाफ: मजबूरन दबाव में आकर इन पॉलिसियों को बेचता है। न बेचो तो ट्रांसफर, गाली-गलौज और टार्गेट का आतंक।
❗️मार्केटिंग इंचार्ज और RM: हर पॉलिसी पर मोटा कमीशन। (2% 5%)
❗️GM और चेयरमैन: पॉलिसियों के नाम पर करोड़ों का खेल।5% & 7%
❗️
@RBI और
@DFS_India : सब जानते हैं, लेकिन आंखें मूंद कर बैठे हैं।
यह बिज़नेस नहीं, यह संगठित अपराध है।
👉ग्राहक FD कराने आता है, उसे जबरन बीमा ठोसा जाता है।
👉शादी के खर्च के लिए पैसा निकालने आता है, उसे बीमा बेच दिया जाता है।
👉कर्ज लेने आता है तो शर्त होती है - पहले बीमा लो, तभी लोन मिलेगा।
यह पूरी रणनीति है ग्राहकों को फंसाने और बेइज्ज़त करने की।
बैंकिंग अब भरोसे का नहीं, लूट और जबरन वसूली का धंधा बन चुकी है।
👉 यह सच्चाई हर घर तक पहुंचनी चाहिए।
👉 RBI और DFS को जवाब देना होगा कि क्यों ग्राहकों का पैसा 65% तक कमीशन की बंदरबांट में चला जाता है?
👉 कब तक भोले-भाले लोग इस बीमा ठगी के शिकार बनते रहेंगे?
@FinMinIndia यह बैंकिंग नहीं, यह आर्थिक डकैती है और इसे रोकना ही होगा।
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