एक तरफ़ युवाओं को रोजगार नहीं, दूसरी तरफ़ गरीबों की रसोई पर हमला।
LPG सिलेंडर महंगे, सब्सिडी कम, महंगाई बेलगाम — मोदी सरकार की नीतियों का सबसे बड़ा बोझ देश के गरीब, मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग उठा रहे हैं।
अरबपति मित्रों को राहत और आम जनता को महंगाई का उपहार — यही है मोदी मॉडल।
देश पूछ रहा है: सरकार आखिर जनता के साथ है या सिर्फ़ अपने चहेते पूंजीपतियों के साथ?
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12 वर्षों की गरीब-विरोधी आर्थिक नीतियों और compromised विदेश नीति ने आज देश को ऐसे हालात में ला खड़ा कर दिया है जहाँ लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को लकड़ी के ज़हरीले धुएं की तरफ धकेल दिया गया है।
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दिया गया। उसपर पिछले 3 महीनों में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम ₹89 बढ़ा दिया गया - मतलब, पहले दाम बढ़ाओ, फिर सब्सिडी घटाओ, गरीबों का चूल्हा बुझाओ।
प्रवासी मजदूरों की जीवनरेखा, 5 किलो का सिलेंडर भी ₹323 महंगा कर दिया - वो कमाएगा क्या, खाएगा क्या, और बचाएगा क्या?
अरबपति मित्रों को लाखों करोड़ों की कर्ज़माफ़ी दिलाना और गरीबों को अपनी नाकामियों का बिल थमाना - ये लूट का मोदी मॉडल है।
मोदी जी, क्या आपकी नाकामियों का बोझ सिर्फ गरीब उठाएंगे? क्या आपकी बनाई इस चरमराती अर्थव्यवस्था की कीमत मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग ही चुकाएंगे?