"गांव में तनाव, लेकिन अनिरुद्ध रहे अलर्ट – टल गई बड़ी अनहोनी"
"अनिरुद्ध की 'गिद्ध निगाहों' से नहीं बच सके आरोपी – गांव पहुंचने से पहले ही मिली भनक"
"तेज़तर्रार थाना प्रभारी ने दिखाई फुर्ती,दूसरी वारदात होने से रोकी"
"सुरक्षा का दूसरा नाम:थाना प्रभारी अनिरुद्ध"
"सिर्फ पुलिस नहीं,फतेहपुर के संकटमोचक हैं अनिरुद्ध"
"नेटवर्किंग के धुरंधर:अनिरुद्ध की तैयारी से थर्राया अपराध"
"सिस्टम से पहले सक्रिय,भीड़ से पहले पहुंचने वाले थानेदार"
"फील्ड पर फैसले, एक्शन में विश्वास –यही हैं अनिरुद्ध"
"अनिरुद्ध ने दिखाई पुलिसिंग की असली परिभाषा"
"जहां खतरा दिखा,वहां पहले पहुंचे–अनिरुद्ध की सूझबूझ से बची जानें"
"अनिरुद्ध की कमान में,कानून सबसे मजबूत"
"जिस गांव में गुस्सा उबाल पर था,वहां अनिरुद्ध ने शांति लिखी"
"सिर्फ वर्दी नहीं,जनता की ढाल हैं अनिरुद्ध"
"अनहोनी की आहट से पहले जागे अनिरुद्ध, साबित किया क्यों हैं सबसे खास"
"अनिरुद्ध ने दिखाया–जब पुलिस तैयार हो,तो हिंसा हारती है"
"थाना प्रभारी अनिरुद्ध की 'गिद्ध निगाहें' और 'आसमान जैसे नेटवर्क' ने टाल दी आखिरी गांव में बड़ी अनहोनी"
– ट्रिपल हत्याकांड के बाद फिर गरमाया गांव,उग्र भीड़ से पहले पहुंची पुलिस, आरोपी पक्ष के 6 लोग थाने लाए गए सुरक्षित
फतेहपुर जनपद के बहुचर्चित आखिरी ट्रिपल हत्याकांड की तपिश आज एक बार फिर गांव को जलाने जा रही थी,लेकिन थाना प्रभारी अनिरुद्ध की चाणक्यनीति,तेज़ नेटवर्क और सर्विलांस की 'गिद्ध जैसी निगाहों' ने एक और नरसंहार को रोककर दिखा दिया कि जब नेतृत्व सतर्क और सजग हो,तो हादसे भी झुक जाते हैं।
घटना की पृष्ठभूमि
ज्ञात हो कि आखिरी गांव में हुए जघन्य ट्रिपल मर्डर केस में मुख्य आरोपी सुरेश उर्फ मुन्नू सिंह व उनके बेटों सहित कई साथियों को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।तब से उनका पूरा परिवार गांव छोड़कर फरार चल रहा था।लेकिन आज दोपहर अचानक मुन्नू सिंह के रिश्तेदार बिनु का भाई पांच अन्य लोगों के साथ एक स्कॉर्पियो में आखिरी गांव पहुंचा तो, जैसे ही ग्रामीणों की नजर उन पर पड़ी–माहौल गरमा गया।
गांव में तनाव की चिंगारी:
ग्रामीणों में आक्रोश इस कदर था कि देखते ही देखते दर्जनों लोग लाठी,डंडा,ईंट और पत्थर लेकर स्कॉर्पियो पर टूट पड़े।अगर 5 मिनट की देरी होती,तो वही स्क्रिप्ट दोहराई जाती–खून, चीख, मातम और फिर पुलिस की जांच।
...लेकिन, अनिरुद्ध थे तैयार!
थाना प्रभारी अनिरुद्ध के लिए यह कोई सामान्य सूचना नहीं थी।सर्विलांस की मजबूत पकड़, सूचना तंत्र की चौकसी और फील्ड इंटेलिजेंस का ऐसा मिश्रण बहुत कम देखने को मिलता है। जैसे ही गाड़ी गांव की ओर मुड़ी, नेटवर्क सक्रिय हुआ।अनिरुद्ध ने बिना समय गंवाए फौरन अपनी फोर्स को तैयार किया और खुद भी भारी पुलिस बल के साथ गांव की ओर कूच कर गए।
पुलिस पहुंची और टली अनहोनी:
जिस वक्त गुस्साई भीड़ स्कॉर्पियो को घेर रही थी,उससे केवल 5 मिनट पहले पुलिस मौके पर पहुंच चुकी थी।थाना प्रभारी ने मौके पर ही मोर्चा संभालते हुए गांव वालों को समझाने का प्रयास किया और बिना किसी बल प्रयोग के मुन्नू सिंह के 6 परिजनों को सुरक्षित थाने ले आए।
शांति भंग की धारा में सभी पर कार्रवाई
थाने लाकर सभी छह लोगों पर शांति भंग की धारा में कार्रवाई कर उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर दिया गया है।वहीं,गांव में पुलिस बल की तैनाती जारी है और माहौल पूरी तरह नियंत्रण में है।
अनिरुद्ध की सराहना पूरे विभाग में
थाना प्रभारी अनिरुद्ध की आज की कार्रवाई पुलिस विभाग के लिए एक नजीर बन गई है। जब अन्य थाना क्षेत्रों में सूचना पहुंचने तक हालात बेकाबू हो जाते हैं, तब फतेहपुर में एक ऐसा अधिकारी भी है–जो नेटवर्क से पहले कदम उठाता है,और भीड़ से पहले पहुंचता है।
विशेष टिप्पणी:
यदि जिले के हर थाना प्रभारी अनिरुद्ध जैसे हों, तो अपराधी भाग नहीं सकते और घटनाएं घट नहीं सकतीं।यह रिपोर्ट न केवल थाना प्रभारी की कार्यकुशलता का सम्मान है,बल्कि पुलिस महकमे के जवानों के लिए एक संदेश है – सतर्कता,नेटवर्किंग और समय पर एक्शन से बड़ा कोई हथियार नहीं।
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