शत्रुओं को मित्र बनाने वाला मंत्र देता हूँ। गुरु गीता का पाठ कर लेना। ललाट पे तिलक कर लेना। हो सके, दीया जलाओ तो ठीक है, नहीं तो चलेगा।
मंत्र बड़ा सरल है, लेकिन बड़ा शक्तिशाली।हूं, हूं, हूं,हूं, हूं, हूं, हूं, हूं, हूं, हूं , हूं इक्कीस बार।
दूसरा मंत्र है, अं रां अं, अं रां अं।
दोनों में से जो अधिक अनुकूल लगे, शत्रुओं को मित्र बना देता है। बस
#AsharamjiBapu