गीता में ये बड़ी अद्भुत विद्या (ब्रह्मविद्या) है । आप ध्यानपूर्वक सुनो और व्यवहार में लाओ तो व्यवहार करते करते भगवत प्राप्ति हो जाए।
ब्रह्मविद्या में एक है अभय विद्या।
आत्मा अमर है, आत्मा सुखरूप है, चेतनरूप है, ज्ञानरूप है और सदा रहता है। मन, शरीर और संसार बदलता है लेकिन चैतन्य आत्मा ज्यों का त्यों रहता है।
#AsharamjiBapuQuotes