अपने निजी विस्तार को छोड़कर राष्ट्रहित सेवा में जितना जन जागृति PIL संघर्ष विधि संविधान की कुसंगतियों को दूर करने हेतु अश्वनी जी किया है इतना तो कॉपी पेस्ट संविधान बनाने वालों ने भी परिश्रम नहीं किया था
देखिए आप एससी एसटी ओबीसी समाज से होते तो विधि की दीमक को नष्ट करने हेतु केंद्रीय विधि मंत्री बना दिए गए होते
रही बात फर्जी शपथ पत्र झूठे गवाह भ्रष्टाचार वालों की तो 6 वर्षों से इनके विरुद्ध हमारा संघर्ष अपनी भूमि बचाने हेतु चल रहा है हमारी भूमि की जीपीएस जांच तहसीलदार की जांच उपायुक्त, CMwindow द्वारा सरकारी खर्चे पर फर्जी शपथ पत्र झूठे गवाह आदि के आवेदन पर भी कराई गई ,इसको यह अधिकार प्राप्त व सक्षम नहीं है कि यह किसी भूमि की रिपोर्ट आदि करे
तदुपरांत भी इस नंबरदार फर्जी शपथ पत्र फर्जी गवाह आदि से 6 वर्षों से व अभी भी घूमा रहा सरकार को
रेवेन्यू विभाग के अधीन यह व्यक्ति ये सारे फर्जी शपथ पत्र गवाही के कांड कर करा रहा है और जिला उपायुक्त के निर्देश पर भी सारी जांच रिपोर्ट आने के उपरांत भी उपमंडल जांच अधिकारी SDO (c) एक शब्द फर्जीवाड़े के विरुद्ध लिखना तो दूर की बात फर्जीवाड़े भ्रष्टाचारीयो के बयान कथन तक भी नहीं लेते है जबकि किसी भी जांच अधिकारी कथन अंकित करने का प्रमुख कर्तव्य हुए होता है देखिए विभाग के समर्थन और सहयोग से ही भ्रष्टाचार होता रहा है जिससे भ्रष्टाचार पर कभी अंकुश नहीं लग पाता है
और हम शिकायतकर्ता आवेदन के उपरांत प्रतिवेदन पर प्रतिवेदन चार बार दे चुके हैं भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई में एक आम शिकायतकर्ता को अधिकारियों, प्रशासन, सरकार के विरोध व भ्रष्टाचारी समाज से भी सामना करना पड़ता विरोध सहना पड़ता है वो अलग
मेरा मानना है जो प्रावधान दंड का अभी है वह भी लागू नहीं हो रहा तो और कड़े दंड प्रावधान बना भी दिए गए तो क्या लागू होंगे
आज किसी की भूमि को हड़पने के लिए फर्जी शपथ पत्र गवाह का प्रयोग का जो दंड प्रावधान है उसका तो दंड दीजिए FIR लिपिबद्ध कीजिए और अतिक्रमण को मुक्त कीजिए
सरकार इस बात को समझे हमने जो 2025 जनवरी में SS17 जो शिकायत दी थी वह अपराधियों को दंड दिलाने के लिए दी थी ना कि केवल जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए दी थी देखिए हमें तो पहले ही पता था ये फर्जी गवाह है यह जांच तो केवल सरकार के लिए है जांच रिपोर्ट के नाम पर लीपापोती केवल अपराधियों को कवरिंग फायर है