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रेखा सुथार 🎐 किताब : क़िस्से लोकल के प्रकाशन : युवान बुक्स पोस्टर 1 : साहित्ययात्री 🎈 #कुछ_अलग_कुछ_नया #dreams #thoughts #unboundscript #sahityayatri [Rekha Suthar, Mumbai, local train, quotes, Life, Art, sahityayatri]
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रेखा सुथार 🎐 किताब : क़िस्से लोकल के प्रकाशन : युवान बुक्स पोस्टर 2 : साहित्ययात्री 🎈 #कुछ_अलग_कुछ_नया #dreams #thoughts #unboundscript #sahityayatri [Rekha Suthar, Mumbai, local train, quotes, Life, Art, sahityayatri]
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Samay Patrika retweeted
'हिट उपदेश' कॉरपोरेट दुनिया के अनकहे नियमों, रिश्तों और संघर्षों को रोचक किस्सों के ज़रिए समझाती है। यह किताब आपको अपनी ताक़त पहचानने, सही फ़ैसले लेने और बदलती पेशेवर दुनिया में अपनी जगह बनाने की समझ देती है। book link: unboundscript.com/products/h…
[ Book of the Week ] पुस्तक 'हिट उपदेश' समकालीन समाज, मीडिया और बाज़ारवाद पर एक बेहद तीखा और मारक व्यंग्य है। लेखक यशवंत व्यास ने अपनी चिर-परिचित शैली में आज के 'हिट' होने की अंधी दौड़ और सफलता के खोखले उपदेशों का शानदार विश्लेषण किया है। किताब यहाँ उपलब्ध है : amzn.to/4opzNL2 @UnboundScript @yv_post @harminderbooks
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[ Book of the Week ] पुस्तक 'हिट उपदेश' समकालीन समाज, मीडिया और बाज़ारवाद पर एक बेहद तीखा और मारक व्यंग्य है। लेखक यशवंत व्यास ने अपनी चिर-परिचित शैली में आज के 'हिट' होने की अंधी दौड़ और सफलता के खोखले उपदेशों का शानदार विश्लेषण किया है। किताब यहाँ उपलब्ध है : amzn.to/4opzNL2 @UnboundScript @yv_post @harminderbooks
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आगामी 12 जून की शाम 6 बजे, तहज़ीब और रवायत के शहर लखनऊ के लूलू मॉल में आयोजित "लूलू रीडर्स फ़ेस्ट" के अंतर्गत "लेखक से संवाद" कार्यक्रम में आपसे मुलाक़ात होगी। यह केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि विचारों, अनुभवों और संवेदनाओं के साझे होने का एक सुंदर अवसर है। @crossword_book और @LuLu_Mall की यह पहल विशेष इसलिए भी है कि यहाँ किताबें केवल अलमारियों में सजी वस्तुएँ नहीं हैं, बल्कि लेखक और पाठक के बीच एक जीवंत पुल हैं। एक ऐसा पुल, जिस पर चलते हुए हम अपने समय, समाज, संघर्षों, उम्मीदों और सपनों के बारे में बात कर सकते हैं। मैं @UnboundScript से प्रकाशित अपनी दोनों चर्चित पुस्तकों—प्रोफेसर की डायरी और जाति जनगणना पर संवाद के बहाने लखनऊ आ रहा हूँ। ये दोनों किताबें तो एक ज़रिया मात्र हैं, असली ख़्वाहिश आप सबसे मिलने, आपकी बात सुनने और अपने समय के सवालों पर एक आत्मीय संवाद करने की है। हर लेखक के लिए उसके पाठक केवल पाठक नहीं होते, वे उसकी यात्रा के सहयात्री होते हैं। जिन लोगों ने मेरी किताबों को पढ़ा है, उन पर विचार किया है, उनसे सहमति या असहमति जताई है, उनसे मिलना हमेशा एक विशेष अनुभव होता है। और जो अभी तक इन किताबों से नहीं जुड़े हैं, उनसे परिचय का यह अवसर भी कम महत्वपूर्ण नहीं। लखनऊ और आसपास के मित्रों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, पाठकों और शुभचिंतकों से आग्रह है कि इस शाम को संवाद की एक साझा शाम बनाइए। आइए, कुछ किताबों की बातें करें, कुछ समाज की, कुछ अपने समय की, और कुछ उन सपनों की जिन्हें अभी पूरा होना है। अभी से तारीख़ दर्ज कर लें- 12 जून, शाम 6 बजे लूलू रीडर्स फ़ेस्ट, लूलू मॉल, लखनऊ
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[ New Book ] शिव शंकर झा की पुस्तक 'ब्रह्म-पत्र' यहाँ उपलब्ध है : amzn.to/4fvsmjd @UnboundScript
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[ New Book ] रेखा सुथार की पुस्तक 'किस्से लोकल के' के यहां उपलब्ध है : amzn.to/4occYud @UnboundScript
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बहुत बहुत बधाई आपको और प्रिय अलिंद को इस पारदर्शिता के लिए साधुवाद जिसकी प्रतीक्षा हर हिंदी लेखक को थी… @theBookwalla
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अच्छा है, जितने प्रकाशक करें। ख्याति ने काम शुरु किया था, अप्रैल और मई का अंतर बस तकनीकी बात। और किसी ने किया हो तो वह भी जनकारी में लाएं।
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May 30
#weekendrecco A modern day Hitopadesh for the employees of the Corporate Jungles.. You enter the jungle with a smile, but soon @yv_post reveals a sharpened claw and rewrites the rule book like a clever fox and to some, the rule book will find uncomfortably familiar... Written with a razor like sharp tongue & a keen eye, the book laughs at the corporate rituals and present some very interesting Survival tips.. Author's disclaimer : The book is Only for the Employees and not for the Owners. Available from today 👉UNBOUND OFFER Link unboundscript.com/products/h…हिट-उपदेश?variant=53960578760996 👉Amazon Link amazon.in/Hit-Updesh.../dp/8…... 👉Antara Books Link antarabooks.com/product/hit-… 👉Flipkart Link flipkart.com/hit-updesh/p/it…... #Khataakk #YashwantVyas #hitupdesh @yv_post @khataakk @UnboundScript facebook.com/share/v/1HtTsk4…

क्या आप भी कॉर्पोरेट जंगल में ऐसे बावले होकर घूम रहे हैं जैसे आपकी कंपनी ने टॉर्च नहीं बनाई तो कल सुबह नहीं होगी ? तो,ये किताब आपके लिए है। 'बेगमपुल से दरियागंज' के लेखक यशवंत व्यास की रेजर मैनेजमेंट पर ताज़ा किताब Grab your HITUPDESH Now, The Unbound Script Edition. @yv_post @UnboundScript UNBOUND OFFER Link bit.ly/3Q3ch9Y Amazon Link bit.ly/4tZKW6m Antara Books Link bit.ly/3Q7pxKL Flipkart Link bit.ly/4uwD6lS #Khataakk #HitUpdesh #YashwantVyas
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आप सभी साथियों, पाठकों, शोधार्थियों और शुभचिंतकों को ढेर सारी बधाई एवं हार्दिक धन्यवाद। 🎉📚 आज “राष्ट्र निर्माण में आदिवासी” पुस्तक की रॉयल्टी एवं सेल स्टेटमेंट प्रकाशक @theBookwalla जी और @UnboundScript की ओर से प्राप्त हुई। यह केवल एक पुस्तक की औपचारिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास, संघर्ष, योगदान और वैचारिक उपस्थिति को गंभीरता से पढ़े और समझे जाने का प्रमाण भी है। इस अवसर पर मैं विशेष रूप से संपादक आशीष मिश्रा जी और उनकी पूरी टीम का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने इस पुस्तक को केवल प्रकाशित ही नहीं किया, बल्कि उसे व्यापक पाठक समाज तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पुस्तक उन तमाम आदिवासी नायकों, जनआंदोलनों, सांस्कृतिक परंपराओं और राष्ट्र निर्माण में आदिवासी समुदायों के ऐतिहासिक योगदान को केंद्र में लाने का एक छोटा-सा प्रयास है, जिन्हें मुख्यधारा इतिहास लेखन में लंबे समय तक उपेक्षित रखा गया। मैं उन सभी पाठकों का भी विशेष धन्यवाद करना चाहता हूँ जिन्होंने इस पुस्तक को पढ़ा, साझा किया, चर्चा की और अपने सुझाव दिए। सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और युवा साथियों का सहयोग और विश्वास लगातार प्रेरणा देता है कि आदिवासी इतिहास, समाज और समकालीन प्रश्नों पर गंभीर लेखन और शोध का कार्य आगे बढ़ाया जाए। यह उपलब्धि व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक है। यह पुस्तक जितनी मेरी है, उतनी ही उन लोगों की भी है जो आदिवासी अस्मिता, इतिहास, संस्कृति और अधिकारों के सवाल को गंभीरता से देखते हैं। आप सभी का स्नेह, विश्वास और समर्थन आगे भी बना रहे — इसी उम्मीद के साथ। बहुत-बहुत धन्यवाद। 🙏 — डॉ. जितेंद्र मीणा
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लेखक और पाठक के बीच प्रकाशक एक अदृश्य धागे की तरह होता है; जो केवल किताबें नहीं छापता, बल्कि रौशनाई से दुनिया को रौशन करने का सपना भी गढ़ता है। सबसे पहले अपनी दोनों किताबों #प्रोफ़ेसर_की_डायरी और #जाति_जनगणना के प्रकाशक @UnboundScript प्रकाशन को उनके 6वें स्थापना दिवस पर ढेर सारी शुभकामनाएँ। हिन्दी प्रकाशन जगत में बहुत कम संस्थान ऐसे होते हैं जो केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि वैचारिक विविधता, गुणवत्ता और भरोसे की पहचान बनते हैं। अनबाउंड ने बेहद कम समय में यह मुक़ाम हासिल किया है। आज के दौर में, जब किताबों की दुनिया कई तरह के संकटों से जूझ रही है, ऐसे समय में किसी प्रकाशन संस्थान का अपने स्थापना दिवस पर किताबों को आधे दाम पर पाठकों तक पहुँचाना सिर्फ़ एक ऑफ़र नहीं, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करने का सांस्कृतिक हस्तक्षेप है। इसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है। बहुत ही उम्दा और सरोकारी पहल के साथ आप अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं। हर हाथ तक किताबें पहुँच सकें, आपकी इस सदिच्छा को हमारी भी हिम्मत मिले। पहली तस्वीर मेरे लिए इसलिए बेहद ख़ास है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में लेखक और प्रकाशक के बीच पारदर्शिता की कमी ने भरोसे को कमज़ोर किया है। कितनी किताबें छपीं, कितनी बिकीं, कहाँ बिकीं, रॉयल्टी का हिसाब क्या है—ये सवाल अक्सर धुंध में खो जाते हैं। ऐसे समय में लेखक को एक डिजिटल डैशबोर्ड उपलब्ध कराना, जहाँ वह अपनी किताबों का पूरा लेखाजोखा देख सके, केवल तकनीकी सुविधा नहीं बल्कि प्रकाशन जगत में एक क्रांतिकारी और नैतिक कदम है। यह पहल भरोसे, पारदर्शिता और पेशेवर ईमानदारी को नई दिशा देगी। दूसरी तस्वीर मेरे लिए भावुक कर देने वाली है। इस साल की पहली तिमाही में हिन्दी की बेस्टसेलर किताबों की सूची आई तो उसमें मेरी दोनों किताबों का शीर्ष पर होना किसी व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक पाठकों के प्रेम का प्रमाण लगा। इसी साल जनवरी में प्रकाशित #जाति_जनगणना पहले स्थान पर है, जबकि पिछले पूरे साल बेस्टसेलर रहने के बाद #प्रोफ़ेसर_की_डायरी ने इस साल भी अपनी जगह बनाए रखकर एक नया कीर्तिमान बनाया है। इसका श्रेय सिर्फ़ लेखक को नहीं, बल्कि उस प्रकाशन संस्थान को भी जाता है जिसने इन किताबों को पाठकों तक पहुँचाने में ईमानदारी और प्रतिबद्धता दिखाई। मुझे सबसे अधिक उम्मीद इस बात से मिलती है कि अनबाउंड केवल एक तरह की किताबें नहीं लाता। बच्चों के लिए सरोकारी साहित्य हो, युवाओं के लिए दिशा देने वाली किताबें हों, सामाजिक न्याय के जटिल सवालों पर गंभीर विमर्श हो, कविता-कहानी हो या तकनीक पर नए प्रयोग—हर क्षेत्र में विविधता दिखाई देती है। जाति जनगणना जैसे मुद्दे पर किताब प्रकाशित करना और साथ ही आदिवासी, दलित, पिछड़े और महिलाओं की आवाज़ को जगह देना बताता है कि यह संस्थान केवल बाज़ार नहीं, समाज की ज़रूरतों को भी समझता है। हिन्दी की दुनिया में ऐसी व्यापकता उम्मीद से भर देती है। शानदार संपादक Ashish और उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई। आपने बहुत मन से और मेहनत से किताबों के संसार में बहुत सार्थक और वैविध्यपूर्ण जोड़ा है। आपकी इस भूमिका की आने वाले दिनों में अहमियत समझी जाएगी, आप यूँ ही उत्साह और उम्मीद को क़ायम रखें। प्रकाशन संस्थान के मुखिया और बेहद ही विनम्र, सहृदय और शानदार शख़्सियत के धनी Alind Maheshwari जी और अनबाउंड स्क्रिप्ट की पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएँ। आपने बहुत कम वक़्त में बहुत ही ज़रूरी भूमिका निभाकर बहुत से उम्मीद जगा दी है। कारवाँ जारी रहे। नोट : किताबों पर 50% की भारी छूट सिर्फ़ आज तक है। किताब प्रेमियों के लिए यह बेहतरीन मौका है। ख़ूब पढ़ें, किताबें भेंट करें और किताबों के ज़रिये एक बेहतर दुनिया बनाने के ख़्वाब में शामिल हों। अनबाउंड स्क्रिप्ट की वेबसाइट- unboundscript.com/?srsltid=A…
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क्या आप भी कॉर्पोरेट जंगल में ऐसे बावले होकर घूम रहे हैं जैसे आपकी कंपनी ने टॉर्च नहीं बनाई तो कल सुबह नहीं होगी ? तो,ये किताब आपके लिए है। 'बेगमपुल से दरियागंज' के लेखक यशवंत व्यास की रेजर मैनेजमेंट पर ताज़ा किताब Grab your HITUPDESH Now, The Unbound Script Edition. @yv_post @UnboundScript UNBOUND OFFER Link bit.ly/3Q3ch9Y Amazon Link bit.ly/4tZKW6m Antara Books Link bit.ly/3Q7pxKL Flipkart Link bit.ly/4uwD6lS #Khataakk #HitUpdesh #YashwantVyas
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किसी भी पब्लिशर का काम किताबों की प्रिंटिंग तक सीमित नहीं हो सकता - यह तो पहला कदम होता है एक लम्बें सफ़र का। असल उद्देश्य तो लेखक, पाठक और प्रकाशक के बीच पारदर्शिता, बराबरी और विश्वास का रिश्ता है। @UnboundScript
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थोड़ा सा इंतजार कीजिए। हिट उपदेश का पेपरबैक आ रहा है। कारपोरेट जंगल में शिकार होने से कैसे बचें। #hitUpdesh @UnboundScript youtu.be/vkQCQ3UKJLY?si=9QwF…
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दैनिक जागरण की जनवरी-मार्च 2026 की हिंदी बेस्टसेलर “कथेतर” में “राष्ट्र निर्माण में आदिवासी” को छटे नम्बर पर रखा गया है यह ऑनलाइन में हो रही बिक्री के आधार पर है। ऑफलाइन में अलग अलग दुकानों से हो रही बिक्री इसमें शामिल नहीं है। हालांकि यह किताब ऑनलाइन की दुनिया में उतनी नहीं चली जितनी ऑफलाइन में ख़रीदी गई है। क्योंकि आदिवासियों की पहुँच अभी भी ऑनलाइन मार्केट तक नहीं है वे अभी भी सामाजिक कार्यकर्ताओं, छोटे दुकानदारों के माध्यम से इस किताब को मंगवा रहे है और पढ़ रहे है। आदिवासी इतिहास के लिहाजा से ये काफ़ी महत्वपूर्ण है। खैर ये सब आप सभी पाठकों की बदौलत है। आपने इसे यहाँ तक पहुंचाया है। मेरे प्रकाशक @theBookwalla @UnboundScript और संपादक आशीष मिश्र ने इस काम को संभव बनाया है इनका तहेदिल से शुक्रिया। जल्दी ही दूसरी किताब “संविधान सभा में आदिवासी” भी प्रकाशित होने वाली है तब तक आपने यदि “राष्ट्र निर्माण में आदिवासी” नहीं पढ़ी है तो पढ़ लीजिए। किताब का लिंक कमेंट बॉक्स में।
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एक लेखक के लिए इससे बड़ी और दुर्लभ उपलब्धि क्या हो सकती है कि उसकी शुरुआती दोनों किताबें ही बेस्टसेलर बन जाएँ। वे अमेज़न की रैंकिंग में नंबर वन रहें, और दैनिक जागरण की बेस्टसेलर सूची में पूरे पिछले साल “प्रोफ़ेसर की डायरी” पहले स्थान पर बनी रहे। इस वर्ष की तिमाही बेस्टसेलर रैंकिंग में भी “प्रोफ़ेसर की डायरी” चौथे स्थान पर है, जबकि हाल ही में प्रकाशित “जाति जनगणना” पहले स्थान पर पहुँच गई है। गाँवों, कस्बों और छोटे शहरों तक इन किताबों की हज़ारों प्रतियाँ पहुँच रही हैं। यहाँ तक कि उनकी पायरेटेड कॉपियाँ भी हज़ारों की संख्या में पढ़ी जा रही हैं। लोग इन किताबों पर चर्चा कर रहे हैं, उन पर कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, और पाठक उन्हें एक-दूसरे को उपहार में दे रहे हैं। और जब ये किताबें वैचारिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हों, तब यह उपलब्धि और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। यह इस बात का संकेत है कि गंभीर साहित्य, विचार और बहस की दुनिया में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में, जब सतही शोर को अधिक जगह मिलती है, तब किताबों के प्रति यह आकर्षण कलम की ताक़त, विचार की शक्ति और पाठकों के भरोसे को और मज़बूत करता है। यह विश्वास दिलाता है कि समाज में अब भी पढ़ने, समझने और सवाल करने वाले लोगों की बड़ी संख्या मौजूद है। इन दोनों किताबों के शानदार संपादन के लिए हिन्दी जगत के उत्कृष्ट संपादक आशीष का विशेष आभार। साथ ही @UnboundScript के प्रकाशक @theBookwalla का भी धन्यवाद, जिन्होंने इतने चुनौतीपूर्ण दौर में वैचारिक किताबों को पाठकों तक पहुँचाने की जिम्मेदारी निभाई। इस स्नेह, विश्वास और प्रेम के लिए सभी पाठकों, साथियों और शुभचिंतकों का हृदय से आभार। अगर आप किताब मँगवाना चाहें तो नीचे दिए गए लिंक पर जा सकते हैं: प्रोफ़ेसर की डायरी – amzn.in/d/fi5Zs9U जाति जनगणना – amazon.in/dp/9347125288
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Happy Mother's Day #MothersDay #unboundscript
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यह पुस्तक जाति जनगणना को आँकड़ों के साथ मिलाकर बल्कि सत्ता, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के संदर्भ में गहराई से समझाती है। इतिहास, राजनीति और सामाजिक आंदोलनों के माध्यम से विषय को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए यह जटिल विमर्श को आम पाठकों के लिए सुलभ और अत्यंत प्रासंगिक बनाती है। किताब यहां उपलब्ध है : amzn.to/4tkBdYS @UnboundScript @DrLaxman_Yadav
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