नीतीश कुमार के हिंदी या अंग्रेज़ी में लेख पर हंगामा नहीं मचा बल्कि विवाद इस बात को लेकर शायद होगा जो नीतीश अब अखबार भी नहीं पढ़ते उन्होंने अपने इस मानसिक स्थिति में ये लेख कब लिख डाला या कब किसको डिक्टेट किया ?? वैसे नीतीश कुछ साल पूर्व तक अंग्रेजी हो या हिंदी में अपने नाम से किसी व्यक्ति को लिखे पत्र या लेख के एक एक शब्द पढ़ते थे और एडिट भी करते थे । ये लेख पूरा फ्रॉड हैं ।
नीतीश कुमार के लेख पर इतना हंगामा मच रहा है--मानो पहली बार किसी नेता ने लेख लिखा है! अखबार-प्रकाशनों में काम करने वाले जानते हैं कि नेताओं/सेलिब्रेटियों के लेख कौन लिखता है। अक्सर वो डिक्टेट किया जाता है, प्रेत लेखन होता है और अनुदित तो ज्यादातर होता है--क्योंकि ज्यादातर नेताओं को अंग्रेजी लिखना नहीं आता। बहुतों को तो बोलना भी नहीं आता।
कई लोगों ने अंग्रेजी को लेकर मजाक उड़ाया है--जिन्हें खुद अंग्रेजी नहीं आती--लेकिन वे अंग्रेजी में भी छपते रहे हैं!
ऐसे में सवाल भाषा ज्ञान का नहीं है, होना भी नहीं चाहिए। बात कथ्य की हो, तो समझ में आए।