यमुनोत्री की हिमाच्छादित गोद से आरंभ होकर, यमुना केवल आगे नहीं बढ़ती, वह अपने साथ जीवन की निरंतरता लेकर चलती है।
एक स्रोत से निकलती यह धारा, आगे चलकर अनेक पारिस्थितिक तंत्रों, जैव विविधता और मानव समुदायों से जुड़ती है।
कभी शांत, कभी प्रबल,
लेकिन अपने उद्गम से सदैव जुड़ी हुई।