नाव पर धान के पौधों संग सफर, पुल अब भी अधूरा | SA News Chhattisgarh
रायगढ़ | 21-08-2025: धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र के बायसी और नरकालो गांवों के बीच आजादी के 79 साल बाद भी एक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। मजबूरी में किसान आज भी उफनती नदी को नाव से पार कर धान के पौधे खेतों तक ले जाते हैं। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह सफर और भी खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल चुनावों में पुल बनाने का वादा होता है, लेकिन हकीकत में अब तक काम अधूरा ही है।
ग्रामीण किसान बताते हैं कि धान की रोपाई के लिए पौधे खेतों तक ले जाना उनकी मजबूरी है। नदी पार करने के दौरान अक्सर नाव पर भीड़ और सामान का बोझ इतना बढ़ जाता है कि पलटने का खतरा बना रहता है। "हम लोग डरते जरूर हैं, लेकिन खेती छोड़ भी नहीं सकते," एक किसान ने कहा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल का निर्माण तीन साल पहले शुरू तो हुआ था, परंतु बरसात आते ही काम रुक जाता है। सूखा मौसम आने पर काम फिर शुरू होता है, लेकिन बहुत धीमी गति से। "सरकार और प्रशासन केवल आश्वासन देते हैं। बरसों से हमारी यही हालत है," ग्रामीणों ने नाराज़गी जताई।
नाव से नदी पार करना महिलाओं और बच्चों के लिए और भी जोखिम भरा है। ग्रामीण बताते हैं कि प्रसव पीड़ा वाली महिलाओं को भी इसी रास्ते से अस्पताल ले जाना पड़ता है। कई बार हालात बिगड़ने पर जान तक जोखिम में पड़ जाती है। शिक्षा पर भी इसका असर साफ दिखता है। बरसात के दिनों में बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं और कई बार पढ़ाई अधूरी रह जाती है।
ग्रामीणों का मानना है कि पुल बनने से खेती, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार होगा। आसपास के सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित आवाजाही की सुविधा मिलेगी। लेकिन अब तक अधूरे पुल ने उनकी उम्मीदों को तोड़ा है। "हर साल सुनते हैं कि जल्दी बनेगा, पर कब तक इंतजार करें?" एक बुजुर्ग ग्रामीण ने सवाल उठाया।
स्पष्ट है कि अधूरा पुल केवल किसानों ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास में बाधा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार और प्रशासन इस बार गंभीरता दिखाएंगे या फिर ग्रामीणों को नाव और जोखिम भरे सफर पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
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