क्या मोदीजी प्रेस से, ऐसी खुली बात कर सकते हैं?
लोकतंत्र सवाल माँगता है, जवाब नहीं बचाव।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 10 साल के शासन में एक भी स्वतंत्र प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की, जहाँ उन्हें देश के हालातों, नीतियों और फैसलों पर बिना तय सवालों के, खुलकर जवाब देना पड़ा हो।
विपक्ष के नेता खुलकर पत्रकारों के सामने आते हैं, आम जनता से सवाल सुनते हैं, जवाब देते हैं।
तो मोदी जी क्यों नहीं?
क्या डर है सवालों से?
क्या जवाब देने की हिम्मत नहीं?
या फिर जवाबों में कुछ छिपाना है?
जब देश का प्रधानमंत्री ही सवालों से भागेगा, तो जवाबदेही का क्या मतलब?
सवाल तो बनता है...
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