आज Lalu Prasad Yadav जी को मन से सलाम करता हूँ।
निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की मिसाल रखी है।
सिर्फ भाषणों में नहीं, आचरण में संस्कार दिखाए।
जब एक पिता अपने सगे बेटे को पार्टी और परिवार से निकाल दे, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका आचरण पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है, तो समझ लीजिए कि नैतिकता आज भी ज़िंदा है।
ये आसान नहीं होता। लेकिन यही तो है असली नेतृत्व – जब निजी रिश्ते भी न्याय और सिद्धांतों के सामने छोटे पड़ जाएं।
लालू जी ने साफ शब्दों में कहा कि उनका बेटा अब पार्टी और परिवार में किसी भी भूमिका में नहीं रहेगा। 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
लोकलाज और जनविश्वास की रक्षा के लिए ये कदम उठाना, एक मिसाल है हर नेता के लिए – कि समाज के सामने खुद को और अपने रिश्तों को भी जवाबदेह बनाना चाहिए।
जो लोग कहते थे कि राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल है, उन्हें आज जवाब मिला है – ये सेवा और संस्कार का क्षेत्र भी हो सकता है, अगर नीयत सच्ची हो।
मैं आज लालू जी को केवल एक नेता नहीं, एक मूल्यनिष्ठ पिता के रूप में देख रहा हूँ, जिनका आदर और सम्मान और भी बढ़ गया है।
Salute to you, Lalu Prasad Yadav Ji.
आपने दिखा दिया कि जो सही है, उसके लिए अपने सबसे करीब को भी छोड़ना पड़े, तो पीछे नहीं हटना चाहिए।
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