क्या केवल प्रक्रिया में होना ही सरकार की उपलब्धि मानी जाएगी? महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीब वर्गों से जुड़ी अधिकांश योजनाएं आज भी प्रक्रियाधीन हैं, जबकि कई योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नजर आती हैं। जिन योजनाओं से समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सीधा लाभ मिलना चाहिए था, वे आज भी जमीन पर उतरने का इंतजार कर रही हैं।
सबसे गंभीर उदाहरण लाह, तसर, महुआ और चिरौंजी जैसे वनोपजों की MSP पर खरीद का है। पिछले बजट में इसकी घोषणा की गई थी, लेकिन ATR में स्वयं सरकार ने स्वीकार किया है कि “इन उत्पादों का क्रय संबंधित विभागों द्वारा नहीं किया जाता है।” यह बेहद गंभीर मामला है और सरकार की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है कि वह अपने ही बजटीय वादों के प्रति कितनी क्रियाशील और संजीदा है।
#PromisesVsReality
#TribalEconomyIgnored
@blsanthosh