भारत का पहला साइबर कैफे: 1 घंटे के लगते थे 800 रुपये
मुंबई: भारत में इंटरनेट क्रांति की शुरुआत 1995 में VSNL ने की थी, जिसके ठीक एक साल बाद देश का पहला साइबर कैफे खुला।
मुंबई के होटल लीला में हुई शुरुआत
भारत का पहला साइबर कैफे जुलाई, 1996 में मुंबई के होटल लीला कैम्फेसकी में खोला गया था। इस ऐतिहासिक कैफे का नाम भी 'CyberCafe' ही रखा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसकी शुरुआत मौरिस डी सूजा ने की थी।
बेहद महंगा था इंटरनेट का इस्तेमाल
आज के दौर में यह सुनकर हैरानी हो सकती है, लेकिन उस समय साइबर कैफे में एक घंटे इंटरनेट सर्फिंग करने का चार्ज 800 रुपये होता था। यह कीमत आज के डेटा पैक के मुकाबले कई गुना ज्यादा थी।
दिल्ली का पहला साइबर क्लब
मुंबई के बाद देश की राजधानी में भी इंटरनेट का क्रेज बढ़ा। दिल्ली का पहला साइबर कैफे 'Cyber Club' के नाम से ITC Maurya होटल में शुरू हुआ था। हालांकि, समय बदलने के साथ अब मुंबई और दिल्ली के ये दोनों ही शुरुआती कैफे बंद हो चुके हैं।
साइबर कैफे के बंद होने की वजह
एक समय लोग ईमेल, पीपीटी बनाने और कॉलेज असाइनमेंट के लिए घंटों यहाँ बिताते थे। लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या घटने लगी:
मोबाइल और वाई-फाई: अब हर घर में स्मार्टफोन, लैपटॉप और सस्ता मोबाइल इंटरनेट उपलब्ध है।
घटती संख्या: 2005 में भारत में करीब 2,00,000 नेट कैफे थे, जो 2016 तक घटकर केवल 72,000 रह गए।
दिल्ली का हाल: दिल्ली में 2008 में जहाँ 8,000 कैफे थे, वहीं 2026 तक इनकी संख्या सिमटकर सिर्फ 2,500 रह गई है।
आज भी कुछ जगहों पर साइबर कैफे मौजूद हैं, लेकिन उनका उपयोग अब केवल विशेष कार्यों या प्रिंटआउट जैसे कामों तक ही सीमित रह गया है।
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