क्या आप जानते हैं?
-EWS criteria, OBC creamy layer की criteria की तुलना में बहुत ही अधिक कठोर है! 👇
1. OBC-NCL में सिर्फ़ माता-पिता की आय देखी जाती है, उम्मीदवार की खुद की आय भी नहीं जुड़ती!
जबकि EWS में पूरे परिवार की आय जोड़ी जाती है, जिसमें माता-पिता, भाई-बहन, ख़ुद, बीवी सब शामिल हैं!
2. OBC-NCL में कृषि, और अन्य पारम्परिक व्यवसायों की आमदानी जोड़ी ही नहीं जाती!जबकि EWS में पूरे परिवार के वेतन के साथ कृषि और अन्य साधनों की आमदनी भी जोड़ी जाती है!
3. OBC-NCL में पिछले 3 सालों की आय का average लिया जाता है!
जबकि EWS में सिर्फ़ एक साल पहले की आय देखी जाती है!
4. OBC-NCL के लिए कोई "asset limit" नहीं!
जबकि EWS में एक "asset criteria" होता है! यानी अगर किसी के पास पांच एकड़ कृषि ज़मीन, या 1,000 वर्ग फुट का आवासीय फ्लैट, या अधिसूचित नगर पालिकाओं में 100 वर्ग गज की आवासीय ज़मीन, या गैर-अधिसूचित नगर पालिकाओं में 200 वर्ग गज की आवासीय ज़मीन है, तो वो EWS नहीं ले सकता!
5. OBC-NCL में सरकारी नौकरियों में आय देखी ही नहीं जाती, सिर्फ रैंक देखी जाती है!अगर किसी के माता-पिता ग्रुप C या D नौकरी में हैं, या माता-पिता में कोई एक ग्रुप B नौकरी में है, तो आय भले ही 8 लाख से ऊपर हो, वो फिर भी OBC-NCL माना जायेगा!
साथ ही अगर प्रोमोशन से ग्रुप A में अगर 40 साल के बाद पहुंचे तो भी उनके बच्चे NCL हैं!
है ना कमाल?
जबकि ऐसा EWS में नहीं!
और इन्ही वजहों से EWS में अधिकांश लोग qualify ही नहीं करते!
ये आरक्षण सिर्फ एक छलावा है!
" मेरे ही ज़ख़्मों से पूछा गया सबब उनका
तीर चलाने वाले से कोई सवाल न हुआ "
🔰 GEN ( अधिकांश सवर्ण ) : 80.09
🔰 जमींदार OBC : 75.55
🔰 भूमिहीन OBC : 75.55
🔰 SC : 69.24
🔰 ST : 69.00
🔰 EWS ( कुछ एक सवर्ण ) : 64.44
पूरा लेख पढ़ें... विशेषकर कुम्हार, राजभर, बिन्द नाई, सुथार, लुहार, छीपा, दर्जी, देवासी, रेबारी, वैष्णव, गोस्वामी, रावना आदि 'भूमिहीन OBC वर्ग' के लोग.... 👇
प्रिय बंधुओं...
हम भारत के नागरिक हैं। यह देश हमारा है। हमें ही इसे मिलकर आगे बढ़ाना है।
कुछ विषयों पर हमें जाति/मज़हब से ऊपर उठकर ईमानदारी दिखलाकर बोलना पड़ेगा।
मैं GEN वर्ग से आता हूँ। और SC वर्ग के जातिगत आरक्षण का समर्थक हूँ। साथ ही अतिपिछड़ों का हक सुनिश्चित करने के लिए OBC वर्गीकरण का पक्षधर हूँ।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं EWS की कम कट-ऑफ़ का समर्थन करने भी लग जाऊँ।
EWS की कठोर शर्त के कारण बहुत कम ब्राह्मण, बनिया, राजपूत व अन्य जनरल जाति केंडिडेट EWS आरक्षण का लाभ ले पाते हैं।
फिर भी उनकी कट-ऑफ़ 'भूमिहीन OBC वर्ग' से कम जाना चिंतनीय है। कुम्हार, नाई, सुथार, लुहार, छीपा, दर्जी, वैष्णव, गोस्वामी, रावणा आदि से के बच्चे EWS से ज्यादा नंबर लाकर भी फेल हो जाते हैं तो यह वाकई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है।
लेकिन...यह स्थिति आई क्यों? और इसका स्थायी समाधान क्या है? आइए... ठंडे दिमाग़ से विमर्श करें... 👇👇👇
[ EWS की कम कटऑफ़ का कारण है - कम संख्या में EWS एप्लीकेशन...]
देश में आबादी कुछ इस प्रकार है 👇
🔰 SC - 16%
🔰 ST - 8%
🔰 भूमिहीन OBC - 40%
🔰 जमींदार OBC - 12%
🔰 अनारक्षित - 24% ( OBC जमींदार 3% बताते 😂)
EWS ≠ सवर्ण आरक्षण
EWS = जातिगत आरक्षण से वंचित जातियों के गरीब तबके को आरक्षण।
24% अनारक्षित वर्ग आबादी वाले देश में से कठोर शर्त के कारण बहुत कम लोग ही EWS आरक्षण का लाभ ले पाते हैं।
EWS Vs OBC क्रीमीलेयर देखिए 👇
🔺मकान सीमा :
OBC में कोई मकान सीमा नहीं है। जबकि कोई कितना भी गरीब हो... उसके पास 1000 स्कवायर फ़ीट से बढ़ा मकान है तो उसे EWS नहीं मिलता।
🔺जमीन की शर्त :
5 एकड़ से अधिक जमीन पर आपको EWS का लाभ नहीं मिलता। वहीं OBC को मिलता है। जिसका फायदा 'जमींदार OBC वर्ग' को ही मिलता है।
🔺ग्रुप B, C व D की नौकरी की आय :
OBC में 8 लाख की क्रीमीलेयर की बात झूठ है। ग्रुप B, C व D की नौकरियों से कोई परिवार भले 30 लाख सालाना कमाए तो भी वह नियमानुसार OBC आरक्षण का हकदार है। जबकि हर स्त्रोत से EWS परिवार 8 लाख कमाता है तो वह आरक्षण से बाहर है।
🔺 कृषि आय :
OBC क्रीमीलेयर में कृषि आय गिनी ही नहीं जाती। जबकि EWS में गिनी जाती है।
🔺 परिवार की परिभाषा :
OBC की परिवार की आय में केवल माता-पिता की आय जुड़ती है, खुद अभ्यर्थी की नहीं। जबकि EWS में अभ्यर्थी समेत सम्पूर्ण परिवार की आय जुड़ती है।
🔺 उम्रसीमा :
OBC को उम्रसीमा छूट मिलती है। जबकि केंद्रीय सेवाओं में EWS को कोई उम्रसीमा छूट नहीं मिलती।
इन सभी कारणों से 99. 99% OBC समाज के लोग OBC का लाभ लेने के लिए नियमानुसार पात्र हैं।
जबकि अनारक्षित समाज का 90% तबका EWS आरक्षण की शर्त से बाहर है। लाभ नहीं ले पाता।
इसी कारण EWS वर्ग में कम एप्लिकेशन आती हैं। और फलत: कट-ऑफ़ कम जाती हैं।
लेकिन इसका समाधान क्या है? 🤔
🔰 OBC जमींदारों के अनुसार समाधान 👇
EWS आरक्षण की समाप्ति। ताकि OBC में उनके एकाधिकार पर प्रश्न उठना ही बंद हो जाए। ताकि वे निर्बाध रूप से OBC की सभी सीटें ले जाए।
🔰 मोहित भारत के अनुसार तार्किक समाधान 👇
1) EWS सरलीकरण
2) OBC से जमींदार बाहर ( ज़ी हाँ... 🙏 )
विस्तार से समझिए... 👇
1) EWS सरलीकरण ( अस्थायी हल ) :
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यदि EWS से मकान की शर्त हट जाए। और उम्रसीमा छूट मिलने लग जाए। क्रीमीलेयर में B, C व D ग्रुप की नौकरी की आय न जुड़े तो...
EWS अभ्यर्थी कई गुना बढ़ जाएंगे। परिणामस्वरूप कटऑफ़ स्वतः नीचे आ जाएगी।
2) OBC से जमींदार बाहर (स्थायी समाधान ) :
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ज़ब जाट, यादव, कुर्मी जैसी तमाम जमींदार जातियों को OBC से बाहर कर दिया जाएगा तो OBC की कटऑफ़ स्वतः गिर जाएगी। जिसका लाभ 'भूमिहीन OBC वर्ग' के लोगों को मिलेगा।
दूसरी बात इन जमींदार जातियों के गरीब तबके को EWS का मलाईदार आरक्षण चखने का मौका भी OBC आरक्षण छोड़ने के अगले दिन से ही मिलने लग जाएगा।
मैं हवा में बात नहीं करता... उदाहरण से समझा देता हूँ।
🔰 हरियाणा में जाट EWS में हैं।
इसलिए EWS कटऑफ़ >>>> OBC कटऑफ़
🔰 राजस्थान में जाट OBC में हैं।
इसलिए OBC कटऑफ़ < EWS कटऑफ़
जमींदार वैसे भी ओवर-रीप्रिजेंटेड हैं। 🙏
EWS खुद वंचित है।
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