𝗛𝗮𝘀𝗱𝗲𝗼 𝗔𝗿𝗮𝗻𝘆𝗮 - 𝗡𝗼𝘁 𝗷𝘂𝘀𝘁 𝗮 𝗳𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁,
𝗶𝘁 𝗶𝘀 𝘁𝗵𝗲 𝗯𝗿𝗲𝗮𝘁𝗵 𝗼𝗳 𝗖𝗲𝗻𝘁𝗿𝗮𝗹 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮.
हसदेव छत्तीसगढ़ का वह जंगल जिसे “ 𝗟𝘂𝗻𝗴𝘀 𝗼𝗳 𝗖𝗵𝗵𝗮𝘁𝘁𝗶𝘀𝗴𝗮𝗿𝗵 " कहा जाता है।
करीब 𝟭.𝟳 लाख हेक्टेयर में फैला भारत के सबसे बड़े 𝗰𝗼𝗻𝘁𝗶𝗴𝘂𝗼𝘂𝘀 𝗱𝗲𝗻𝘀𝗲 𝗳𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁𝘀 में से एक। साल, सागौन, महुआ, तेंदू, चार, हर्रा, बहेरा और सैकड़ों औषधीय पेड़ों का घर। हाथियों का कॉरिडोर। आदिवासियों की जीवनरेखा।
और अब कोयले की भूख का शिकार।
यह जंगल कोरबा, सरगुजा और सूरजपुर जिलों में फैला है। इसके बीच से हसदेव नदी बहती है, जो आगे जाकर महानदी की सहायक नदी बनती है। यही जंगल 𝗛𝗮𝘀𝗱𝗲𝗼-𝗕𝗮𝗻𝗴𝗼 𝗿𝗲𝘀𝗲𝗿𝘃𝗼𝗶𝗿 को पानी देता है। हजारों आदिवासी परिवार -गोंड, उरांव, कोरवा - सदियों से यहां जंगल के साथ जीते आए हैं।
𝟮𝟬𝟬𝟵 में भारत सरकार ने इस इलाके को “𝗡𝗼-𝗚𝗼 𝗔𝗿𝗲𝗮” माना था क्योंकि यहां की 𝗯𝗶𝗼𝗱𝗶𝘃𝗲𝗿𝘀𝗶𝘁𝘆 और 𝗱𝗲𝗻𝘀𝗲 𝗳𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁 𝗰𝗼𝘃𝗲𝗿 बेहद संवेदनशील थी। लेकिन फिर राजनीति और कोयले के दबाव ने फैसले बदल दिए।
𝟮𝟬𝟭𝟭 के बाद कई 𝗰𝗼𝗮𝗹 𝗯𝗹𝗼𝗰𝗸𝘀 को 𝗰𝗹𝗲𝗮𝗿𝗮𝗻𝗰𝗲 मिलने लगी। सबसे विवादित नाम बना - 𝗣𝗮𝗿𝘀𝗮 𝗘𝗮𝘀𝘁 & 𝗞𝗲𝗻𝘁𝗲 𝗕𝗮𝘀𝗮𝗻 (𝗣𝗘𝗞𝗕) 𝗰𝗼𝗮𝗹 𝗯𝗹𝗼𝗰𝗸
खनन का काम राजस्थान की सरकारी बिजली कंपनी 𝗥𝗩𝗨𝗡𝗟 के लिए किया गया, लेकिन 𝗺𝗶𝗻𝗶𝗻𝗴 𝗼𝗽𝗲𝗿𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 का बड़ा हिस्सा 𝗔𝗱𝗮𝗻𝗶 𝗘𝗻𝘁𝗲𝗿𝗽𝗿𝗶𝘀𝗲𝘀 के हाथ में गया। इसके बाद पेड़ों की कटाई शुरू हुई। सड़कें बनीं। जंगल टूटने लगा।
आंकड़ा:
लगभग 81,866 पेड़ काटे गए
गांवों के लोग खड़े हुए। महिलाओं ने पेड़ों को पकड़कर रोका। आदिवासी महीनों धरने पर बैठे। “𝗛𝗮𝘀𝗱𝗲𝗼 𝗕𝗮𝗰𝗵𝗮𝗼 𝗔𝗻𝗱𝗼𝗹𝗮𝗻” पूरे देश में पहचान बना। 𝗔𝗰𝘁𝗶𝘃𝗶𝘀𝘁 और कई स्थानीय ग्रामीण लगातार विरोध करते रहे। क्योंकि उन्हें पता था - जंगल कटेगा तो सिर्फ पेड़ नहीं मरेंगे।
हाथियों के रास्ते टूटेंगे।
मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ेगा।
जलस्रोत सूखेंगे।
तापमान बढ़ेगा।
बारिश का पैटर्न बदलेगा।
और सबसे पहले बर्बाद होंगे वहां रहने वाले गरीब लोग।
𝗥𝗲𝗽𝗼𝗿𝘁𝘀 के अनुसार यहां 𝟵𝟬 𝗯𝗶𝗿𝗱 𝘀𝗽𝗲𝗰𝗶𝗲𝘀, 𝗹𝗲𝗼𝗽𝗮𝗿𝗱𝘀, 𝘀𝗹𝗼𝘁𝗵 𝗯𝗲𝗮𝗿𝘀, 𝗲𝗹𝗲𝗽𝗵𝗮𝗻𝘁𝘀, 𝘄𝗼𝗹𝘃𝗲𝘀 और कई 𝗦𝗰𝗵𝗲𝗱𝘂𝗹𝗲-𝗜 𝘀𝗽𝗲𝗰𝗶𝗲𝘀 पाई जाती हैं।
यह 𝗖𝗲𝗻𝘁𝗿𝗮𝗹 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 के आखिरी बचे 𝘂𝗻𝗳𝗿𝗮𝗴𝗺𝗲𝗻𝘁𝗲𝗱 𝗳𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁𝘀 में गिना जाता है।
फिर भी कटाई जारी रही।
2022 - PEKB Phase 2 शुरू
𝟮𝟬𝟮𝟮 में भारी विरोध के बावजूद 𝗣𝗮𝗿𝘀𝗮 𝗰𝗼𝗮𝗹 𝗯𝗹𝗼𝗰𝗸 में हजारों पेड़ों की कटाई हुई।
अनुमानित कटाई:
कुछ reports में 15,000 trees तक claim किया गया।
2022–2023
आंकड़ा:
7,960 पेड़ काटे गए।
2023–2024
आंकड़ा:
12,631 पेड़ और काटे गए।
अक्टूबर 2024 रिपोर्ट:
सिर्फ 2 दिनों में लगभग 5,800 पेड़ काटे गए।
𝟮𝟬𝟮𝟲 में फिर खबर आई कि नए 𝗺𝗶𝗻𝗶𝗻𝗴 𝗽𝗿𝗼𝗽𝗼𝘀𝗮𝗹 के लिए लगभग 𝟰.𝟰𝟴 लाख और पेड़ काटने की मांग रखी गई है।
सोचिए।
हम 𝗔𝗖 बढ़ाकर गर्मी से नहीं बचेंगे अगर जंगल खत्म हो गए।
हम 𝗼𝘅𝘆𝗴𝗲𝗻 𝗰𝘆𝗹𝗶𝗻𝗱𝗲𝗿 खरीदकर 𝗻𝗮𝘁𝘂𝗿𝗲 𝗿𝗲𝗽𝗹𝗮𝗰𝗲 नहीं कर सकते।
एक 𝗺𝗮𝘁𝘂𝗿𝗲 𝗳𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁 बनने में सदियां लगती हैं। काटने में कुछ दिन।
𝟮𝟬𝟭𝟰 के बाद भारत में हजारों हेक्टेयर 𝗳𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁 𝗹𝗮𝗻𝗱 अलग-अलग 𝗽𝗿𝗼𝗷𝗲𝗰𝘁𝘀 के लिए 𝗱𝗶𝘃𝗲𝗿𝘁 की गई है। 𝗙𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁 𝗿𝗲𝗽𝗼𝗿𝘁𝘀 लगातार बता रही हैं कि 𝗱𝗲𝗻𝘀𝗲 𝗻𝗮𝘁𝘂𝗿𝗮𝗹 𝗳𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁𝘀 घट रहे हैं, भले ही 𝗽𝗹𝗮𝗻𝘁𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗻𝘂𝗺𝗯𝗲𝗿𝘀 बढ़ाकर 𝘀𝘁𝗮𝘁𝗶𝘀𝘁𝗶𝗰𝘀 अच्छे दिखाए जाएं। 𝗡𝗮𝘁𝘂𝗿𝗮𝗹 𝗳𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁 और 𝗽𝗹𝗮𝗻𝘁𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 एक चीज नहीं होते।
एक असली जंगल सिर्फ पेड़ों का 𝗰𝗼𝗹𝗹𝗲𝗰𝘁𝗶𝗼𝗻 नहीं होता। वह मिट्टी, नदी, जानवर, पक्षी, आदिवासी संस्कृति और 𝗰𝗹𝗶𝗺𝗮𝘁𝗲 का जीवित सिस्टम होता है।
हसदेव सिर्फ छत्तीसगढ़ का मुद्दा नहीं है।
यह सवाल है कि भारत विकास किस कीमत पर चाहता है।
अगर आज हम चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियां किताबों में पढ़ेंगी कि कभी भारत में ऐसे जंगल हुआ करते थे जहां हाथी चलते थे, नदियां जिंदा थीं, और हवा सांस लेने लायक थी।
𝗛𝗮𝘀𝗱𝗲𝗼 बचाना सिर्फ 𝗲𝗻𝘃𝗶𝗿𝗼𝗻𝗺𝗲𝗻𝘁𝗮𝗹 𝗶𝘀𝘀𝘂𝗲 नहीं। यह 𝗵𝘂𝗺𝗮𝗻𝗶𝘁𝘆 𝗶𝘀𝘀𝘂𝗲 है।
#𝗦𝗮𝘃𝗲𝗛𝗮𝘀𝗱𝗲𝗼
#𝗦𝗮𝘃𝗲𝗙𝗼𝗿𝗲𝘀𝘁𝘀
@moefcc @UNFCCC @CoalMinistry