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विधायक जी आजकल आपका जलजला है।कानपुर से फ्लाइट बढ़वाने के लिए आप भी ज़रा जोर लगा दीजिये। एक दो बार काफिले के साथ युवा केंद्रीय नागरिक उद्ययन मंत्री जी मिल लीजिये. क्या पता युवा नेतृत्व से ही काम बन जाए.
यात्री सुविधा दिवस के विशेष अवसर पर बिठूर के माननीय विधायक श्री अभिजीत सिंह सांगा @AbhijeetSanga जी ने एयरपोर्ट की सेवाओं और व्यवस्थाओं को लेकर अपना अनुभव साझा किया। आपके मार्गदर्शन और शब्दों के लिए हृदय से आभार! 🙏#YatriSuwidhaDiwas #KanpurAirport @AAI_Official @MoCA_GoI
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जेवर एयरपोर्ट के इस फ्लाइट शेड्यूल में #Kanpur को ढूंढिए. 300 KM से कम दूर पंतनगर और बरेली से फ्लाइट है. सबसे ज्यादा उड़ानें इंडिगो की हैं. विमानों की कमी सिर्फ एक बहाना है. इसी उपलक्ष्य में सांसद जी को सिविल एविएशन मिनिस्टर से मिल कर फिर से लेटर गेम खेलना शुरू कर देना चाहिए.
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अंकित शुक्ल retweeted
Trump’s "24-hour peace deal" just failed for the 40th time Instead of peace, Middle East is escalating: -- Israel striking Beirut -- Iran targeting ships in Hormuz Geopolitics isn't a real estate deal. You can't bully an existential, multi-front war with boardroom bluster Watch my breakdown on why escalationtrap.substack.com/…

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अंकित शुक्ल retweeted
INDIAN LIVES MATTER.3 Indian ships have been attacked by the Americans and 3 innocent unarmed Indians murdered. Video clips show the ship was static. No transcripts of communications between ship and US Navy have been provided. 90% of Iran,s oil goes to China. Reportedly over 100 Chinese ships have Jumped this blockade. Not one Chinese or Russian ship has been struck. Just because India has gone out of its way to be friendly with US, it has responded by attacking our ships and murdering our sailors. Kissinger had rightly said- it is dangerous to be an enemy of US but it is FATAL to be a friend.There is a school of thought that IS LEAST CONCERNED WITH THE DEATH OF POOR INDIANS. Their deaths they feel should not poop the party in Europe G7.So the initial response was to shrug it off and make a pro-forma protest without Calling the press. It was only when there was outrage in the Indian public did we gather the courage to protest loud and clear. Pak had made it a habit to kill unarmed Indians till we pushed back. Now the Americans are ushering in a new era of colonialism and gun boat diplomacy. There are those in India who would like to compete with Mulla Munir in licking Trumps shoes. Was 250 years of Colonization not enough? Can we kindly outgrow this slavish mentality and behave with the gravitas of a 10,000 years old civilizational state?Just see how China treated Trump.

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अंकित शुक्ल retweeted
India statement: Strong protest against U.S. Navy attacks that killed three. Such lethal actions are not justified U.S. Statement: Commercial vessels should immediately comply with U.S. forces. No violations of the Iran blockade will be tolerated
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कड़ी निंदा के बाद दूसरी तरफ से ये जवाब आया.
Violations of the U.S. blockade and the illicit transport of Iranian oil will not be tolerated: US Secretary of State Rubio to EAM Dr Jaishankar during ystyd talks after killing of Indian sailors
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Power of the triple engine government.
एक बारिश में चमक उठा कानपुर धन्यवाद @mayorkanpur 📍कर्रही ठाकुर चौराहा, बर्रा
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अंकित शुक्ल retweeted
Jun 13
"We have spoken with the Master of the vessel Liaki Freedom, who has confirmed that all crew members are safe and that the reported information is false, says Ministry of External Affairs on reports of the vessel with Indian crew hit by military strike.
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अंकित शुक्ल retweeted
CNN Chronicling that 39 times Trump told that a Deal was in hand with Iran 🫠
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टोपी ट्रांसफर कर रहा है ये, खुद को अच्छा दिखाने के लिए. ईरान ने कल भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला किया जिसे नाकाम भी कर दिया गया. क्या आपने ये खबर कहीं पढ़ी, सुनी, देखी? भारत सरकार का कोई बयान? मैरिटाइम आर्गेनाइजेशन का कोई अपडेट? ये निर्लज्ज, लम्पट अपनी सेना की कारस्तानी छिपा रहा.
Trump claims that Iran conducted drone attack on Indian ships leaving Hormuz. His claim comes in a week when US made stikes on vessels killing 3 Indian sailors prompting Delhi to summon US diplomat twice.
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जब एक सशक्त और नामी नेता आपके शहर की अगुवाई करता है,तो शहर कुछ ऐसे बदलता है. कानपुरवाले बुरा न माने.. बनारस देखें. गोरखपुर देखे.. और फिर खुद के बारे में सोचे. एक ढंग का बस अड्डा तक नहीं है. एयरपोर्ट है पर फ्लाइट नहीं है. लिए टहलते रहिये इंडस्ट्रियल सिटी का तमगा, वो भी छिन रहा है.
गोरखपुर शहर का ट्रांसपोर्ट नगर सिक्स लेन फ्लाईओवर बनकर तैयार । इसी महीने होगा उद्घाटन । फ्लाईओवर की कुल लंबाई 2.6 KM लगत 430 करोड़।
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TACO.
तय आपको करना है ! #Iran #IranWar‌ #WestAsiaCrisis
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कुछ लोग इतिहास पढ़ते हैं कुछ इतिहास लिखते हैं कुछ इतिहास बनाते हैं।नेहरू ने इतिहास पढ़ा इतिहास लिखा और इतिहास बनाया इसलिए वो अद्वितीय थे हैं और रहेंगे।
जवाहरलाल नेहरू केवल स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नहीं थे, वे उस भारत के स्वप्नद्रष्टा थे जो सदियों की गुलामी के बाद आधुनिकता, विज्ञान, लोकतंत्र और आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने खड़ा होना चाहता था। महात्मा गांधी ने उन्हें हिन्द का जवाहर कहा था। यह संबोधन केवल स्नेह का प्रतीक नहीं था, बल्कि उस विश्वास की अभिव्यक्ति भी था जो गांधी जी को नेहरू की क्षमता, दृष्टि और नेतृत्व पर था। गांधी समझते थे कि स्वतंत्र भारत को केवल राजनीतिक मुक्ति नहीं, बल्कि आधुनिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की भी आवश्यकता होगी। उन्हें नेहरू में वह व्यक्तित्व दिखाई देता था जो परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बन सकता था। हिन्द का जवाहर कहकर उन्होंने नेहरू को उस अनमोल रत्न के रूप में देखा जो राष्ट्र के मुकुट की शोभा बढ़ाता है। रामधारी सिंह दिनकर जैसे राष्ट्रकवि ने उन्हें लोकदेव कहा। यह शब्द केवल प्रशंसा नहीं था। दिनकर जानते थे कि नेहरू की लोकप्रियता सत्ता से नहीं, जनता के विश्वास से उपजी थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में गांवों, कस्बों और शहरों में लाखों लोग उन्हें देखने और सुनने उमड़ पड़ते थे। उनमें जनता को अपना भविष्य दिखाई देता था। वे राजनेता कम, जनआकांक्षाओं के प्रतिनिधि अधिक थे। इसलिए दिनकर ने उन्हें लोकदेव कहा जनता के हृदय में प्रतिष्ठित व्यक्तित्व। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी नेहरू को जनता का प्रिय नेता माना। दोनों के बीच विचारों के मतभेद जगजाहिर थे, लेकिन राष्ट्रीय जीवन में नेहरू के महत्व को स्वयं पटेल ने स्वीकार किया। वे जानते थे कि यह व्यक्ति भारत को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उसे आधुनिक राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में देखना चाहता है। भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं, संसदीय परंपराओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के निर्माण में नेहरू का योगदान एक बहुमूल्य रत्न की तरह था। कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर ने उन्हें ऋतुराज कहा। ऋतुराज नवजीवन, नवसृजन और नई चेतना का प्रतीक। कविगुरु ने नेहरू में उस नई पीढ़ी का प्रतिनिधि देखा जो अतीत का सम्मान करते हुए भविष्य की और बढ़ना चाहती थी। नेहरू की दृष्टि केवल राजनीतिक नहीं थी उसमें संस्कृति, विज्ञान, साहित्य और मानवता का व्यापक संसार समाहित था। वे कारखानों को आधुनिक भारत के मंदिर कहते थे, लेकिन साथ ही बच्चों की मुस्कान, किताबों की दुनिया और कला की स्वतंत्रता को भी उतना ही महत्व देते थे नेहरु ने स्वतंत्र भारत को लोकतंत्र पर विश्वास करना सिखाया। जब एशिया और अफ्रीका के अनेक नए राष्ट्र तानाशाही की और बढ़ रहे थे, तब भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, स्वतंत्र चुनाव, स्वतंत्र न्यायपालिका और संसदीय व्यवस्था को मजबूती से स्थापित किया गया। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी। दुनिया के अनेक विद्वान उस समय आशंकित थे कि इतना विशाल, विविध और गरीब देश लोकतंत्र को संभाल नहीं पाएगा। लेकिन नेहरू ने लोकतंत्र को केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र का हिस्सा बनाने का प्रयास किया। उन्होंने वैज्ञानिक सोच को राष्ट्रनिर्माण का आधार बनाया। बड़े बांध, इस्पात संयंत्र, वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान, प्रौद्योगिकी संस्थान और विश्वविद्यालय ये सब केवल परियोजनाएं नहीं थीं। ये उस आधुनिक भारत की नींव थीं जिसकी कल्पना उन्होंने की थी। आज भारत जिस वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता पर गर्व करता है, उसकी अनेक आधारशिलाएं नेहरू युग में रखी गईं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी नेहरू ने भारत को एक स्वतंत्र आवाज़ दी। जब दुनिया दो गुटों में बंट रही थी, तब उन्होंने गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाकर भारत को अपनी शर्तों पर दुनिया से संवाद करने का साहस दिया। नवस्वतंत्र देशों के लिए वे आशा और आत्मसम्मान के प्रतीक बन गए। निस्संदेह, नेहरू त्रुटिहीन नहीं थे। उनकी नीतियों, निर्णयों और राजनीतिक आकलनों पर बहस होती रही है और होती रहेगी। इतिहास का न्याय भी इसी में है कि वह किसी व्यक्ति को देवत्व नहीं देता, बल्कि उसके योगदान और सीमाओं दोनों का मूल्यांकन करता है। परंतु यह भी उतना ही सत्य है कि नेहरू का कद केवल उनकी सफलताओं या असफलताओं से नहीं मापा जा सकता। उनका महत्व उस दृष्टि में था जिसने एक नवस्वतंत्र राष्ट्र को भविष्य की और देखने का साहस दिया। इसलिए जब गांधी नेहरू को हिन्द का जवाहर कहते हैं, जब दिनकर उन्हें लोकदेव कहते हैं और जब रवींद्रनाथ उन्हें ऋतुराज कहते हैं, तो ये शब्द उस ऐतिहासिक स्वीकृति के प्रतीक हैं जो एक असाधारण व्यक्तित्व को मिली। कुछ लोग अपने युग में रहते हैं, और कुछ लोग अपने युग को निर्माण करते हैं। जवाहरलाल नेहरू उन लोगों में थे जो अपने युग का ख़ुद निर्माण करते है ।🌹
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अंकित शुक्ल retweeted
As US Navy is hunting down one vessel after another with Indian crew members, it is time to realise why people like me objected to GoI's lame reaction to US Navy's aggressive moves through our EEZ around Lakshadweep and sinking of Iranian naval vessel IRIS Dena in Indian Ocean. Those who argued at that time that Indian Ocean in not Indian should be ashamed of themselves. You allow a robber to rob in your neighborhood, your house could be the next one.
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RT @MohtaPraveenn: #CRPF जवान के विडियो में लगाए गए आरोपों पर ACP अभिषेक पांडेय, दोनों पक्ष एक ही परिवार से हैं, लेकिन फिलहाल अलग रह रहे…
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क्या ITBP के बाद CRPF के जवानों को भी कानपुर में अपनी आवाज सुनाने के लिए संगठित होना पड़ेगा? ये नहीं होना चाहिए, लेकिन बार बार ऐसी नौबत ही क्यों आ रही?
CRPF’s CoBRA commando says village strongman physically abused his family, Kanpur police in Uttar Pradesh registered cases under mild sections. मैं देश की रक्षा करूँ या परिवार की रक्षा करूँ?
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अंकित शुक्ल retweeted
आख़िर क्या है मीनाक्षी नटराजन के ख़िलाफ़ तेलंगाना वाला मामला? एक तो यह एफआईआर नहीं, निजी शिकायत है; लेकिन ‘सिर्फ़ नोटिस’ कहना भी पूरा सच नहीं राज्यसभा नामांकन रद्द होने के बाद शिकायत, संज्ञान, समन और लंबित आपराधिक मामले के बीच कानूनी अंतर को समझना ज़रूरी है। मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन आज 9 जून 2026 को जिस हैदराबाद प्रकरण के आधार पर रद्द किया गया, उसके बारे में राजनीतिक दावों ने कानूनी तथ्यों को लगभग ढक दिया है। भाजपा इसे “लंबित आपराधिक मामला छिपाने” का प्रकरण बता रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उनके विरुद्ध न कोई एफआईआर है, न विधिवत आपराधिक मुकदमा; केवल एक निजी शिकायत पर जारी नोटिस है। उपलब्ध दस्तावेजों और समाचार रिपोर्टों को साथ रखकर देखें तो दोनों पक्षों के दावों में कुछ सच है; लेकिन दोनों का राजनीतिक निष्कर्ष अपने-अपने पक्ष में खींचा हुआ है। मामला वास्तव में क्या है? 20 अगस्त 2025 को XXX नामक महिला ने हैदराबाद के फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के न्यायालय में एक शिकायत दी थी। मीडिया रिपोर्टों और भाजपा की आपत्ति में इस शिकायत का उल्लेख SR No. 4472/2025 के रूप में किया गया है। शिकायत में मीनाक्षी नटराजन को आरोपी संख्या चार अर्थात् A-4 बताया गया। यह समझना ज़रूरी है कि किसी निजी शिकायत में शिकायतकर्ता किसी व्यक्ति को “आरोपी” लिख दे तो यह अदालत का उसे अपराधी मान लेना नहीं होता। यह केवल शिकायतकर्ता का आरोप और उसके पक्षकारों का विवरण होता है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 सहित कई धाराओं का उल्लेख बताया गया है। शिकायतकर्ता ने कथित रूप से ₹10 करोड़ के मुआवजे अथवा क्षतिपूर्ति की मांग भी की है। नटराजन पर सीधे क्या आरोप लगाया गया? मीनाक्षी नटराजन पर स्वयं किसी यौन अपराध में शामिल होने का आरोप नहीं है। शिकायत का केंद्रीय आरोप यह है कि उन्होंने तेलंगाना कांग्रेस के नेता कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया और उनके विरुद्ध की गई शिकायतों पर संगठनात्मक कार्रवाई नहीं होने दी। XXX का दावा बताया गया है कि उन्होंने पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेताओं को शिवकुमार रेड्डी के कथित आचरण की जानकारी दी थी; लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी कथित निष्क्रियता, संरक्षण अथवा आपराधिक सहयोग के आधार पर नटराजन सहित कुछ अन्य नेताओं को शिकायत में पक्षकार बनाया गया। इन आरोपों को अभी सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार न तो नटराजन के विरुद्ध पुलिस जांच हुई है, न आरोपपत्र दाखिल हुआ है और न किसी अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया है। शिवकुमार रेड्डी के विरुद्ध मूल आरोप क्या थे? सार्वजनिक रिकॉर्ड में यह अवश्य मिलता है कि अगस्त 2023 में बेंगलुरु पुलिस ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी के विरुद्ध दुष्कर्म का मामला दर्ज़ किया था। उस रिपोर्ट में कथित घटना अक्टूबर 2021 की बताई गई थी। हैदराबाद के पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन में भी पहले इसी प्रकार की शिकायत या FIR होने की खबरें प्रकाशित हुई थीं। लेकिन दो सावधानियां आवश्यक हैं। पहली, 2023 के बेंगलुरु मामले की समाचार रिपोर्टों में शिकायतकर्ता की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई थी। इसलिए उपलब्ध स्वतंत्र रिकॉर्ड के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि उस मामले की शिकायतकर्ता और वर्तमान निजी शिकायत दाखिल करने वाली XXX एक ही महिला हैं। दूसरी, “2022 में हैदराबाद और 2023 में बेंगलुरु में घटनाएं हुईं” इस सटीक कालक्रम की स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती। बेंगलुरु FIR 2023 में दर्ज़ हुई थी, पर आरोपित घटना 2021 की बताई गई थी। अतः ख़बर में दर्ज़ होने की तारीख़ और कथित घटना की तारीख़ को अलग-अलग लिखना चाहिए। निजी शिकायत और FIR में क्या अंतर है? यही इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु है। FIR पुलिस थाने में दर्ज़ होती है और उसके बाद पुलिस जांच, साक्ष्य-संग्रह और आरोपपत्र की प्रक्रिया चलती है। इसके विपरीत, निजी शिकायत कोई व्यक्ति सीधे मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करता है। मजिस्ट्रेट पहले यह देखता है कि शिकायत में प्रथमदृष्टया कोई अपराध बनता है या नहीं। इस स्तर पर शिकायत केवल न्यायालय के सामने विचारार्थ रखी गई सामग्री होती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नटराजन को जो नोटिस जारी हुआ, वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के अंतर्गत था। इस धारा की विशेषता यह है कि मजिस्ट्रेट किसी निजी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले प्रस्तावित आरोपी को सुनने का अवसर देता है। इसका अर्थ यह हुआ कि धारा 223 का नोटिस सामान्यतः प्री-कॉग्निजेंस, अर्थात् अदालत के औपचारिक संज्ञान लिए जाने से पहले की प्रक्रिया है। रिपोर्टों के अनुसार नोटिस 17 सितंबर 2025 को जारी हुआ और नटराजन के वकील ने 24 अक्टूबर 2025 को उसका उत्तर प्रस्तुत कर दिया। केवल नोटिस का जारी होना अपने आप में यह सिद्ध नहीं करता कि अदालत ने नटराजन के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा शुरू कर दिया था। फिर विवाद कहां पैदा हुआ? नामांकन की जांच के दौरान भाजपा प्रत्याशी महेश केवट ने आपत्ति प्रस्तुत की कि हैदराबाद की अदालत में नटराजन के विरुद्ध मामला लंबित है; लेकिन उन्होंने अपने चुनावी हलफ़नामे में इसका उल्लेख नहीं किया। रिटर्निंग ऑफि़सर ने इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए कथित रूप से यह निष्कर्ष दिया कि संबंधित न्यायालय शिकायत पर संज्ञान ले चुका था और समन जारी हो चुके थे। इसी आधार पर नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। यह निष्कर्ष कांग्रेस के दावे के ठीक विपरीत है। कांग्रेस का कहना है कि न कोई FIR है, न संज्ञान, न विधिवत समन; सिर्फ़ ₹10 करोड़ की क्षतिपूर्ति संबंधी कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए, इस आशय का नोटिस था। इस विरोधाभास को राजनीतिक बयानों से नहीं, हैदराबाद अदालत के मूल आदेश, आदेश-पत्र और 9 जून 2026 तक की केस-स्टेटस रिपोर्ट से ही सुलझाया जा सकता है। क्या FIR न होना ही पर्याप्त बचाव है? नहीं। चुनाव आयोग का फॉर्म-26 केवल यह नहीं पूछता कि उम्मीदवार के विरुद्ध कोई FIR है या नहीं। उसमें सभी लंबित आपराधिक मामलों का विवरण मांगा जाता है। इसके प्रपत्र में FIR संख्या के साथ-साथ न्यायालय, केस संख्या, लागू धाराएं, अपराध का विवरण और आरोप तय हुए हैं या नहीं; ये जानकारियां अलग-अलग मांगी गई हैं। इसलिए कांग्रेस का यह तर्क कि “FIR नहीं थी, इसलिए कुछ बताना आवश्यक नहीं था”, कानूनी प्रश्न को पूरी तरह हल नहीं करता। इसके उलट भाजपा का यह तर्क भी स्वतः सिद्ध नहीं हो जाता कि किसी निजी शिकायत में नाम लिखते ही वह उम्मीदवार के विरुद्ध ऐसा लंबित आपराधिक मामला बन जाती है, जिसका फॉर्म-26 में उल्लेख अनिवार्य हो। निर्णायक सवाल ये हैं: क्या 9 जून 2026 तक मजिस्ट्रेट ने शिकायत पर विधिवत संज्ञान ले लिया था? क्या नटराजन को धारा 223 का प्री-कॉग्निजेंस नोटिस मिला था या संज्ञान के बाद न्यायिक समन? क्या मामला केवल SR नंबर के स्तर पर था अथवा उसे नियमित आपराधिक केस नंबर मिल चुका था? क्या ऐसी प्री-कॉग्निजेंस शिकायत फॉर्म-26 में “लंबित आपराधिक मामला” मानी जाएगी? नटराजन ने संबंधित कॉलम खाली छोड़ा था या स्पष्ट रूप से “कोई मामला नहीं” लिखा था? अदालतों ने चुनावी हलफ़नामों में खाली छोड़े गए अनिवार्य कॉलम और कथित रूप से ग़लत अथवा अपूर्ण जानकारी देने के मामलों के बीच भी अंतर किया है। इसलिए रिटर्निंग ऑफि़सर की सारांश जांच में नामांकन रद्द करने की सीमा भी आगे कानूनी विवाद का विषय बन सकती है। कांग्रेस और भाजपा के दावों का तथ्यात्मक परीक्षण कांग्रेस का दावा कांग्रेस का यह कहना तथ्यात्मक रूप से मज़बूत दिखाई देता है कि मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध इस मामले में कोई पुलिस FIR सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। यदि नोटिस धारा 223 BNSS के अंतर्गत था तो उसका जारी होना सामान्यतः संज्ञान से पहले की प्रक्रिया है। लेकिन केवल FIR न होने से यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि चुनावी हलफ़नामे में किसी न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख कभी आवश्यक नहीं हो सकता। भाजपा और रिटर्निंग ऑफिसर का दावा यदि हैदराबाद के मजिस्ट्रेट ने वास्तव में संज्ञान ले लिया था और नियमित समन जारी किए थे तो उस मामले को फॉर्म-26 में न बताना गंभीर प्रश्न बन सकता है। लेकिन यदि केवल धारा 223 का प्री-कॉग्निजेंस नोटिस था और अदालत ने अभी यह भी तय नहीं किया था कि शिकायत पर मुकदमा चलना चाहिए या नहीं, तो उसे पूर्णतः लंबित आपराधिक मामला मानकर नामांकन रद्द करना अत्यधिक कठोर और न्यायिक परीक्षण योग्य निर्णय हो सकता है। फिलहाल सबसे तथ्यसम्मत निष्कर्ष 9 जून 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर सबसे सुरक्षित और सटीक निष्कर्ष यह है: मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध इस प्रकरण में पुलिस की कोई FIR सार्वजनिक रूप से दर्ज दिखाई नहीं देती। हैदराबाद की अदालत में उनके विरुद्ध एक निजी आपराधिक शिकायत अवश्य प्रस्तुत हुई थी और उस पर BNSS की धारा 223 के अंतर्गत नोटिस जारी होने की रिपोर्ट है, जो सामान्यतः संज्ञान से पहले की प्रक्रिया होती है। इसके विपरीत मध्य प्रदेश के रिटर्निंग ऑफि़सर ने यह माना कि अदालत संज्ञान लेकर समन जारी कर चुकी थी। मूल न्यायिक आदेश सामने आए बिना इन दोनों दावों में से किसी एक को अंतिम सत्य नहीं कहा जा सकता। इसी कारण यह केवल मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी का विवाद नहीं रह गया है। यह अब चुनावी हलफ़नामे में खुलासे की सीमा, निजी शिकायत की न्यायिक स्थिति और रिटर्निंग ऑफिसर की नामांकन रद्द करने की शक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण चुनाव-विधि का मामला बन गया है। 9 जून की रात तक कांग्रेस निर्वाचन आयोग के समक्ष अपना विरोध दर्ज़ करा चुकी है और आयोग 10 जून को प्रतिनिधिमंडल को सुनने अथवा रिटर्निंग ऑफि़सर से रिपोर्ट मंगाने की संभावना व्यक्त की गई थी। #MadhyaPradesh #MP #Bhopal #MPPolitics #MeenakshiNatarajan #RajyaSabha #MadhyaPradesh #NominationRejected #MPNews
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बारिश में यात्री चमचमाती मेट्रो से झकरकटी मेट्रो स्टेशन पर उतरेगा. उसके बाद बस अड्डे के गड्डों में खो जायेगा. या कृपा रही तो हाईटेक बस टर्मिनल का काम शुरू हो जायेगा. ज़ब बनना शुरू होने में इतने साल लगे तो बन कर तैयार होने में तो दशक लग जायेगा. तब तक मेट्रो स्टेशन किस काम आएगा?
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क्या मंत्री जी, राजस्थान, बिहार, MP, प. बंगाल, आंध्र प्रदेश में कांग्रेस का शासन है? यहाँ कितना vat कम हुआ? ठीक है कि रेट बढ़ाने कि मज़बूरी है अभी, लेकिन जब कच्चे तेल के रेट कम थे, 20% इथेनाल ब्लेंडिंग कर रहे थे. रूस से तेल खरीद रहे थे, तब जनता को उसका कोई लाभ दिया था?
जब मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी घटा सकती है, भाजपा शासित राज्य VAT घटा सकते हैं....... तो कांग्रेस शासित राज्य VAT क्यों नहीं घटा सकते? भाजपा शासित राज्यों की तुलना में प्रति लीटर पेट्रोल पर ₹10 से अधिक की वसूली क्यों?
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अंकित शुक्ल retweeted
Tonight, a prayer for the mother of Sepoy Janjal Pravin Prabhakar receiving her son’s Kirti Chakra. Young Sepoy Janjal was killed in action in July 2024 after killing 2 terrorists in Kulgam, J&K. 💔🇮🇳
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