मैं राजनीति को जमीन से समझने के लिए भारत के लगभग हर राज्य में जाकर लोगों से बातचीत कर रहा हूँ। अभी तक मैं लगभग 15 राज्यों में जा चुका हूँ और इस समय तमिलनाडु में हूँ।
एक बात जो इस यात्रा में सबसे स्पष्ट रूप से समझ में आई, वह यह है कि राजनेताओं की बातों के आधार पर किसी राज्य या समाज की छवि नहीं बनानी चाहिए। कई बार राजनीति में ऐसी बातें कही जाती हैं जो समाज को बांटती हैं।तमिलनाडु के बारे में दूर से जो एक छवि बनाई जाती है, जमीन पर आकर वह पूरी तरह टूट जाती है। यहाँ के लोग भी उतने ही सभ्य, सरल और अपनी संस्कृति से जुड़े हुए हैं, जितने भारत के किसी भी अन्य राज्य के लोग होते हैं।
आज मैं भाषा के विषय पर बात करना चाहता हूँ।
हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व करना सीखना चाहिए और उसे अपनी आने वाली पीढ़ियों को जरूर सिखाना चाहिए। एक मैथिल होने के नाते जब मैं अपने घर और आसपास के परिवारों में आने वाली पीढ़ी को मैथिली से दूर होता देखता हूँ, तो दुख होता है। क्योंकि भाषा के माध्यम से ही हमारी संस्कृति, मान्यताएँ और संस्कार जीवित रहते हैं।और मैं यह बात केवल मैथिली के लिए नहीं कह रहा हूँ, बल्कि भारत की हर भाषा और बोली के लिए कह रहा हूँ। मातृभाषा को संरक्षित करना केवल भावनात्मक विषय नहीं है, इसके कई तार्किक कारण भी हैं:
1. व्यक्ति अपनी मातृभाषा में सबसे स्पष्ट और गहराई से सोच और समझ सकता है, जिससे शिक्षा और बौद्धिक विकास बेहतर होता है।
2. भाषा के माध्यम से इतिहास, साहित्य, लोककथाएँ और परंपराएँ अगली पीढ़ी तक पहुँचती हैं।
3. शोध बताते हैं कि यदि किसी बच्चे की मातृभाषा में मजबूत पकड़ होती है, तो वह अन्य भाषाएँ भी अधिक आसानी से सीख सकता है।
4. मातृभाषा समाज के भीतर संवाद और विश्वास को मजबूत करती है।
5. हर भाषा मानव सभ्यता की बौद्धिक विरासत है। जब कोई भाषा समाप्त होती है तो उसके साथ ज्ञान और सांस्कृतिक दृष्टिकोण भी खो जाते हैं।
आज नेपाल के मेयर बालेन शाह (जो भविष्य में प्रधानमंत्री बन सकते हैं) को मैथिली में बात करते हुए देखा, तो गर्व महसूस हुआ। मुझे मैथिली आती है और जब मैं दो मैथिल लोगों को आपस में मैथिली में बात करते देखता हूँ तो एक अलग ही अपनापन महसूस होता है।
साथ ही मैं यह भी कहना चाहूँगा कि अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अंग्रेज़ी और हिंदी भी सीखिए।यदि आप उत्तर भारत से हैं तो कम से कम एक दक्षिण भारतीय भाषा सीखने का प्रयास कीजिए, और यदि आप दक्षिण भारत से हैं तो हिंदी सीखना भी उपयोगी होगा।
जब आप भारत के अलग-अलग हिस्सों में यात्रा करेंगे, तो आपको यह अनुभव होगा कि हमारी भाषा भले अलग हो, लेकिन हमारी संस्कृति, सोच और स्वभाव काफी हद तक एक जैसे हैं।भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता है।
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@ShahBalen